पितृपक्ष विशेष: बोधगया में बुद्ध मंदिर परिसर में भी होता है पिंडदान, वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम

IANS | September 27, 2026 10:24 PM

बोधगया, 27 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के गया जिले में स्थित बोधगया दुनिया भर में भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली और यूनेस्को विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बोधगया का पितृपक्ष और श्राद्धकर्म की परंपरा से भी गहरा संबंध है। सनातन परंपरा के अनुसार यहां पितृ तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है और पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं।

गयाजी में इन प्रमुख स्थानों पर पिंडदान का है विशेष महत्व, अलग-अलग दोषों से मिलती है मुक्ति

IANS | September 27, 2026 4:52 PM

गयाजी, 27 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष के दौरान बिहार का गयाजी दुनिया भर के सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से लाखों लोग अपने पूर्वजों के निमित्त यहां पहुंचते हैं। शास्त्रों में गयाजी को पितृ कर्म के लिए सर्वोच्च तीर्थ बताया गयाजी है और कहा जाता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने पर सात पीढ़ियों तक के पितरों का उद्धार होता है।

पितृपक्ष में मोक्षदायी नासिक और पंढरपुर, गोदावरी और चंद्रभागा तट पर पितरों को मिलती है शांति

IANS | September 26, 2026 10:40 PM

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए देशभर में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। महाराष्ट्र के नासिक और पंढरपुर को भी पितृकर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। नासिक में गोदावरी नदी के तट और पंढरपुर में चंद्रभागा नदी के किनारे श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त स्नान, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

पितृपक्ष : राजस्थान का चमत्कारी पितृ तीर्थ लोहार्गल, जहां सूर्यकुंड में प्राप्त होती है मुक्ति

IANS | September 26, 2026 9:57 PM

लोहार्गल, 26 सितंबर (आईएएनएस)। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित लोहार्गल यानी लोहागढ़ को राजस्थान के प्रमुख पितृ तीर्थों में माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि लोहार्गल के पवित्र सूर्यकुंड में अस्थि विसर्जन करने से अस्थियां जल में विलीन हो जाती हैं और मृतकों को मुक्ति प्राप्त होती है।

महाभारत काल से जुड़ा है पाण्डु पिंडारा धाम का इतिहास, पिंडदान से मिलता है पितरों को मोक्ष

IANS | September 26, 2026 8:12 PM

जींद, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष के दौरान देशभर में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। हरियाणा के जींद स्थित पाण्डु पिंडारा धाम को भी पितृकर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान और अनुष्ठान करने से पितरों को मोक्ष और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। पितृपक्ष के साथ ही यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है और अमावस्या के दिन विशेष रूप से बड़ी भीड़ जुटती है।

राजस्थान: पितृपक्ष में पुष्कर के 52 घाटों पर उमड़ते हैं श्रद्धालु, जानें श्राद्ध और पिंडदान का महत्व

IANS | September 26, 2026 6:10 PM

पुष्कर, 26 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रह्माजी की नगरी और तीर्थ गुरु के रूप में प्रसिद्ध पुष्कर में पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं। मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर तीर्थ में पितरों के लिए किए गए श्राद्ध और पिंडदान से उन्हें तृप्ति, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बिहार : गयाजी में पितृपक्ष में दिख रहा आस्था के साथ सेवा का संकल्प भी, श्रद्धालुओं की थाली सजा रही ‘जीविका दीदी की रसोई’

IANS | September 26, 2026 2:30 PM

गयाजी, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितरों के मोक्ष की कामना लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से गयाजी पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए इस बार आस्था के साथ सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में संचालित ‘जीविका दीदी की रसोई’ श्रद्धालुओं के लिए किफायती, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन का भरोसेमंद ठिकाना बनकर उभरी है। यहां आने वाले पिंडदानियों को उनकी धार्मिक आस्था और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिना प्याज और लहसुन का निरामिष भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

पितृपक्ष : उज्जैन में पिंडदान का खास महत्व, माता पार्वती से जुड़ी है सिद्धवट की प्राचीन मान्यता

IANS | September 26, 2026 1:46 PM

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। कोई घर पर श्राद्ध करता है, तो कोई पवित्र नदियों के किनारे जाकर तर्पण और पिंडदान करता है। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन भी ऐसी ही जगहों में शामिल है, जहां पितरों के लिए किए जाने वाले इन कर्मों की पुरानी परंपरा रही है।

पितृपक्ष : काशी में विधि-विधान से श्राद्ध करने पर मिलती है प्रेत योनि से मुक्ति, पिशाचमोचन कुंड का है विशेष महत्व

IANS | September 26, 2026 1:15 PM

वाराणसी, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष शुरू होते ही लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए गया, प्रयागराज और हरिद्वार की ओर रुख करते हैं, लेकिन काशी की धार्मिक परंपरा में एक मान्यता ऐसी है जो इसे सबसे अलग बनाती है। कहा जाता है कि यदि किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो गया जाने से पहले काशी में पिंडदान करना आवश्यक होता है। इसी वजह से काशी को पितरों के श्राद्ध का प्रथम द्वार भी कहा जाता है।

पितृपक्ष में कौवे को भोजन खिलाने से जुड़ी है ये पौराणिक कथा और मान्यता

IANS | September 26, 2026 1:06 PM

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने वाला पितृ पक्ष शनिवार से शुरू हो चुका है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध एवं पितृ पक्ष कहलाता है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितरों के श्राद्ध का भोजन कौवे को खिलाने की परंपरा है।