मुंबई, 6 फरवरी (आईएएनएस)। मुंबई ने एक दुर्लभ और भावनात्मक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया, जब चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में निकाली जा रही चिन्मय अमृत यात्रा शहर में पहुंची। यह यात्रा गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद की आध्यात्मिक विरासत, वेदांत की कालजयी शिक्षाओं, पवित्र स्मृति चिह्नों और दुर्लभ अभिलेखों को अपने साथ लेकर आई। यह आयोजन चिन्मय अमृत महोत्सव के अंतर्गत हो रहा है, जो मिशन के 75 वर्षों की साधना, सेवा और ज्ञान यात्रा का प्रतीक है।
मुंबई में इस यात्रा का स्वागत चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद और मिशन के पूर्व वैश्विक प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद के मार्गदर्शन में किया गया। यह अवसर मिशन के वर्षभर चलने वाले समारोहों की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
चिन्मय अमृत यात्रा एक 295 दिनों की लंबी आध्यात्मिक यात्रा है, जिसकी शुरुआत 31 दिसंबर 2025 को पुणे स्थित चिन्मय विभूति से हुई थी। यह यात्रा लगभग 35,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और भारत के प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ नेपाल और श्रीलंका तक पहुंचेगी। इस यात्रा का समापन 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। यात्रा का उद्देश्य वेदांत के सार्वभौमिक संदेश को सीमाओं से परे, विभिन्न संस्कृतियों तक पहुंचाना है।
इस यात्रा का एक प्रमुख आध्यात्मिक स्तंभ डिजिटल यज्ञ है, जिसमें पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के दुर्लभ और चयनित प्रवचनों को क्षेत्रीय भाषाओं में सबटाइटल और वॉइसओवर के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका विशेष उद्देश्य युवाओं और पहली बार वेदांत से जुड़ने वाले लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं से सहज और प्रभावी ढंग से जोड़ना है।
यात्रा के साथ चल रही विशेष रूप से डिजाइन की गई चलित वाहिनी श्रद्धालुओं को गुरुदेव के जीवन और शिक्षाओं से रूबरू कराती है। इसमें गुरुदेव की पवित्र पादुकाएं, वस्त्र और उनके व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं रखी गई हैं। साथ ही, आकर्षक और भावनात्मक इंस्टॉलेशन के माध्यम से उनकी आध्यात्मिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह स्थान सामूहिक प्रार्थना, आत्मचिंतन और सीख का केंद्र बनता है। पादुका पूजा, संवाद सत्र और सामुदायिक गतिविधियां इस यात्रा को और भी सार्थक बनाती हैं।
मुंबई में यात्रा का स्वरूप एक जीवंत आध्यात्मिक जुलूस जैसा रहा। पारंपरिक शोभायात्रा, सामूहिक प्रार्थनाएं, भजन और सेवा कार्यों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। देशभर से आए युवा वीर यानी युवा स्वयंसेवक, इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा हैं। इनमें से कई युवा लगभग 300 दिनों तक देशभर में यात्रा करने का संकल्प लेकर इस सेवा में जुटे हैं। वे इसे पूज्य गुरुदेव के प्रति सेवा और समर्पण मानते हैं। यह पहल युवाओं में अनुशासन, एकता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूत करती है।
मुंबई कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल हुईं, जिनमें श्रीधर नारायण (सीईओ, हीरानंदानी), जयंत पाटिल (ट्रस्टी, एलएंडटी एम्प्लॉई ट्रस्ट), अशोक वाधवा (ग्रुप सीईओ, एम्बिट प्राइवेट लिमिटेड), और नितिन परांजपे (चेयरमैन, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड) प्रमुख रहे।
यात्रा के नेतृत्वकर्ता स्वामी अनुकूलानंद ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं से संवाद स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि गीता पंचामृत के ढांचे के तहत गीता की शिक्षाओं को दैनिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि स्पष्ट सोच, मजबूत चरित्र और उद्देश्यपूर्ण जीवन को बढ़ावा मिले।
पूज्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि चिन्मय अमृत यात्रा केवल एक भौतिक यात्रा नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण की सामूहिक प्रक्रिया है। यह यात्रा दिखाती है कि भगवद्गीता की शिक्षाएं आज भी आधुनिक जीवन को संतुलन, शक्ति और करुणा प्रदान करती हैं।
चिन्मय मिशन के 75 वर्षों के इस ऐतिहासिक उत्सव का समापन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन के साथ होगा, जिसमें देश-विदेश से हजारों साधक और श्रद्धालु शामिल होंगे।
--आईएएनएस
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