नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को श्रीकृष्ण की माता यशोदा का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन माता यशोदा की पूजा की जाती है और उनके साथ बाल कृष्ण के स्वरूप की विधि-विधान से आराधना होती है।
यह पर्व खासतौर पर संतान सुख की कामना करने वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यशोदा जन्मोत्सव के दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ से संतान प्राप्ति, संतान की सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि होती है।
इस दिन यशोदा के साथ ही उनके लाल कृष्ण की पूजा का भी विशेष विधान है। पूजा में दूध, दही, मक्खन, मिश्री और फल चढ़ाए जाते हैं। भजन-कीर्तन के साथ आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।
दृक पंचांग के अनुसार, 7 फरवरी को कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 बजकर 54 बजे सुबह से 8 फरवरी तक रहेगी। शनिवार के दिन नक्षत्र चित्रा है, जो 8 फरवरी की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा कन्या राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो शनिवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 2 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए बहुत अच्छा समय है। अमृत काल शाम 7 बजकर 31 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जिसमें पूजा या कोई शुभ कार्य करना विशेष फलदायी होता है। अन्य शुभ मुहूर्त में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 9 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 3 मिनट से 6 बजकर 29 मिनट तक है।
अशुभ समय का विचार करें तो राहुकाल सुबह 9 बजकर 51 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 7 बजकर 6 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य नहीं करना चाहिए।
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