पितृ पक्ष विशेष: परशुराम कुंड से लेकर प्रिंसेप घाट तक, जहां पितरों को मिलता है मोक्ष का द्वार

IANS | September 26, 2026 10:51 AM

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इन 16 दिनों में परिवार के सदस्य अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किया गया दान और तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है और उन्हें मोक्ष प्रदान करता है। देशभर में इसके लिए कई पवित्र स्थल हैं, लेकिन इनमें दो स्थानों का महत्व सबसे अलग है-अरुणाचल प्रदेश का परशुराम कुंड और कोलकाता का प्रिंसेप घाट।

पुनपुन घाट :'पितृ तीर्थ' गया से पहले पिंडदान करने का स्थान और 'मोक्ष का प्रथम द्वार'

IANS | September 26, 2026 8:17 AM

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाला 16 दिनों का विशेष पक्ष है। इस अवधि में लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और अन्य पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों पितरों का स्मरण और उनके नाम से दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितृपक्ष 2026: यूपी के इन तीर्थ स्थानों पर पिंडदान से मिलती है पितरों को मुक्ति, जानिए मान्यता और महत्व

IANS | September 25, 2026 5:34 PM

लखनऊ, 25 सितंबर (आईएएनएस)। 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृपक्ष में पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान का विशेष महत्व है और इसके लिए गया ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी कई पवित्र स्थल हैं। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से लेकर काशी के मणिकर्णिका घाट, मथुरा के ध्रुव घाट और अयोध्या के 'सरयू तट' तक पर पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मिलने की मान्यता है।

पितृपक्ष: पितरों से पहले क्यों किया जाता है ऋषि-मुनियों का तर्पण?

IANS | September 25, 2026 3:14 PM

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। 16 दिनों तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष में हम अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे।

पितृपक्ष में नई शुरुआत से करें परहेज : नए कपड़े और चीजें खरीदें या नहीं, जानिए क्या है मान्यता?

IANS | September 25, 2026 12:55 PM

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है, जो इस वर्ष 26 सितंबर से पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुरू होगी और 10 अक्टूबर तक चलेगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष के 16 दिन वह अवधि है, जब पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। इसे 'सोलह श्राद्ध' या 'महालय पक्ष' भी कहते हैं।

पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू, जानिए पूरी श्राद्ध तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

IANS | September 25, 2026 12:43 PM

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने का 16 दिनों का एक पवित्र काल है। इस अवधि में पितरों की आत्मा की शांति के लिए मुख्य रूप से तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न व जल ग्रहण करने की कामना रखते हैं।

गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ: विसर्जन से पहले करें ये जरूरी पूजा और विदाई रस्में

IANS | September 25, 2026 11:39 AM

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। विशेष बात यह है कि गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। ऐसे में गणेश उत्सव के बाद बप्पा को विदाई देने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अनंत चतुर्दशी का खास महत्व है।

अनंत चतुर्दशी : समुद्र मंथन से जुड़ी है कथा, बांधा जाता है 14 गांठों वाला सूत्र    

IANS | September 25, 2026 11:23 AM

नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व खास माना जाता है। अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जा रही है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। अनंत चतुर्दशी व्रत को करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है।

ब्रह्मा का एक मात्र मंदिर, पुष्कर सरोवर पितरों के मोक्ष का स्थान, जहां भगवान राम ने पिता दशरथ का किया था श्राद्ध

IANS | September 23, 2026 7:53 PM

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू सनातन परंपरा में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। श्राद्ध पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। देशभर में कई तीर्थस्थल श्राद्ध और तर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन राजस्थान के पुष्कर को पितृ कर्म के लिए विशेष तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालु अपने 7 कुलों और 5 पीढ़ियों तक के पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।

जब माता सीता ने बालू से ही पिंड बनाकर किया था अपने ससुर का पिंडदान, जानिए गया से जुड़ी पौराणिक कहानी

IANS | September 23, 2026 2:34 PM

गयाजी, 23 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार का गया (गयाजी) सिर्फ एक ऐतिहासिक शहर ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म में पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए बेहद पवित्र स्थान माना जाता है। खासकर पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचते हैं। गया में पिंडदान की परंपरा माता सीता द्वारा अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान करने से जुड़ी है।