भानु सप्तमी : सूर्य देव की उपासना का विशेष दिन, जानें अभिजित और विजय मुहूर्त

भानु सप्तमी : सूर्य देव की उपासना का विशेष दिन, जानें अभिजित और विजय मुहूर्त

नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। फाल्‍गुन माह के कृष्‍ण पक्ष की सप्‍तमी तिथि 8 फरवरी को है। यह दिन सूर्य देव की आराधना से जुड़ा है। पंचांग के अनुसार रविवार को भानु सप्‍तमी पर्व है। इस दिन सूर्य देव की आराधना, जप-तप और दान करने से पुण्य मिलता है और जीवन में यश-तरक्की के साथ सकारात्मकता बढ़ती है।

दृक पंचांग के अनुसार 8 फरवरी, रविवार को भानु सप्तमी या रथ सप्तमी है, यह दिन सूर्य देव की उपासना के लिए बहुत खास माना जाता है और भी विशेष है कि इस बार सप्तमी तिथि रविवार के साथ पड़ रही है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

भानु सप्तमी को रवि सप्तमी या रथ सप्तमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा, अर्घ्य और दान करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बीमारियां दूर होती हैं और जीवन की हर बाधा खत्म हो जाती है। कारोबार में तरक्की होती है, धन-धान्य की वृद्धि होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

8 फरवरी के पंचांग के अनुसार सूर्योदय 7 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 9 फरवरी सुबह 5 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र स्वाती रहेगा और योग गण्ड।

सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय के साथ ही है। ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 13 मिनट पर होगा। अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट और विजय मुहूर्त 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक है, जो अति शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें लाल फूल, लाल चंदन या रोली, अक्षत मिलाकर जल देना चाहिए। इस दौरान लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है। सूर्य देव को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके जल अर्पित करें और ' ओम सूर्याय नमः' या गायत्री मंत्र का जाप करें। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। इसके लिए गेहूं, गुड़, तांबा, लाल कपड़ा या गन्ना दान करना श्रेयस्कर होता है।

भानू सप्तमी पर सूर्य देव की आराधना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। रविवार को राहुकाल शाम 4 बजकर 43 मिनट से 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, यमगंड 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक और गुलिक काल 3 बजकर 21 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक है। इसलिए इस दौरान पूजा या कोई नया या शुभ कार्य न करें।

--आईएएनएस

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