काशी, 5 फरवरी (आईएएनएस)। महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इसे लेकर देवाधिदेव महादेव के धाम काशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं।
श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए जिगजैग बैरिकेडिंग के साथ झांकी दर्शन की व्यवस्था की गई है। वहीं, भारी भीड़ को देखते हुए ओआरएस, ग्लूकोज युक्त पानी, पंखे और कूलर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर स्पर्श दर्शन और प्रोटोकॉल दर्शन पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
बताया जा रहा है कि शिव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का उत्सव पूरे शहर के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन काशीवासी बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर उनकी भव्य बारात में भी शामिल होते हैं।
प्रशासन के अनुमान के अनुसार, इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए काशी पहुंच सकते हैं। महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी की रात 2 बजे से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा, जो 16 फरवरी की रात शयन आरती तक लगातार खुला रहेगा। इससे श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ के दर्शन में काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रबंध किए जा रहे हैं। सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। 15 तारीख को सुबह 2 बजकर 15 मिनट पर मंगला आरती शुरू होगी। अगले दिन जब तक शयन आरती नहीं हो जाती, लगातार दर्शन जारी रहेंगे।
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि महापर्व है। इस दौरान भक्तों की संख्या अधिक होती है। इस दौरान कोई विशेष कार्यक्रम मंदिर की तरफ से आयोजित नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि महाशिवरात्रि के दौरान किसी भी तरह के विशेष प्रोटोकॉल के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
महाशिवरात्रि के पर्व पर दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से पेन, बैग, डिजिटल घड़ी, मोबाइल फोन, तंबाकू, पॉलीथिन और प्लास्टिक की पानी की बोतल लेकर ना आने की अपील की गई है।
--आईएएनएस
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