हजारी प्रसाद द्विवेदी पुण्यतिथि विशेष: हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाले विचारक और आलोचक थे द्विवेदी

IANS | May 18, 2026 11:26 PM

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में आज भी जब किसी महान साहित्यकार की चर्चा होती है तो हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। 19 मई 1979 को इस संसार से विदा हुए द्विवेदी अपनी रचनाओं के जरिए हर पीढ़ी के बीच अमर रहे।

कवि मंगलेश डबराल की रचनाओं में सामाजिक अन्याय और पाखंड के खिलाफ उठती थी आवाज

IANS | May 15, 2026 11:40 PM

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर, कवि, गद्यकार और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल हिंदी साहित्य जगत का एक ऐसा नाम है, जिनकी कविताएं पाठक को एक अलग अपनी दुनिया में ले जाती हैं, जो उसे अपनी ही लगती है। सरल, सौम्य और विनम्र व्यक्तित्व वाले कलमकार ने अपनी कविताओं में इंसानी संवेदनाओं को गहराई से उकेरा।

जब बाल मन में 'लक्ष्मण रेखा' से बैठा डर, 'सीता हरण' अध्याय से जुड़ी रवींद्रनाथ टैगोर की वह कहानी

IANS | May 6, 2026 5:50 PM

नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। राजसी ठाट-बाट और शानो-शौकत वाला एक अमीर खानदान। बंगाल के सबसे बड़े शहर कोलकाता में उस ठाकुर खानदान का रुतबा था। दूर-दूर तक लोग इस परिवार की चर्चा किया करते थे। इसी खानदान में जब देवेंद्रनाथ ठाकुर और सारदा देवी की 14वीं संतान के रूप में बेटा आया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि सारी दुनिया में एक दिन उसके नाम का डंका बजेगा। बात हो रही है रवींद्रनाथ टैगोर की।

'टेक्नोलॉजी लॉ' पुस्तक लोकार्पण पर अर्जुन राम मेघवाल बोले, एआई इंसानों की जगह नहीं ले सकता

IANS | April 30, 2026 7:56 PM

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। “इनोवेशन, टेक्नोलॉजी या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी इंसान की जगह नहीं ले सकते। एआई कई चुनौतियां पेश करता है, और हम तकनीकी रूप से अत्यधिक उन्नत हो चुके हैं, लेकिन यह किसी व्यक्ति की जगह नहीं ले सकता,” केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने प्रौद्योगिकी कानून: विनियम, साइबर नीति और डिजिटल परिदृश्य पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर कहा। यह पुस्तक रॉडनी डी. राइडर और निखिल नरेन द्वारा लिखी गई है।

यादों में रेणु : 'मैला आंचल' के 'गुलफाम', समाज, साहित्य और सादगी को साधने वाले शब्दशिल्पी

IANS | April 10, 2026 9:32 PM

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल की 11 अप्रैल कैलेंडर पर दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह तारीख उस आवाज की खामोशी का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुख को शब्दों में ऐसा ढाला कि वे हमेशा के लिए जीवंत हो गए। साल 1977 में 11 अप्रैल को ही साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था। इस दिन उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश जरूर हो गई, लेकिन उनकी लिखावट आज भी रंगमंच से लेकर लोगों के जीवन में उपस्थित है।

कश्मीरी लाल जाकिर : बंटवारे के दर्द और पीड़ा को शब्दों में समेटने वाले कलमकार

IANS | April 7, 2026 12:07 AM

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। कश्मीर की पीड़ा, बंटवारे के घाव और समाज की असमानताओं को अपनी कलम के जरिए बयां करने वाले साहित्यकार थे कश्मीरी लाल जाकिर। शायर से लेखक बने जाकिर साहब ने अपनी रचनाओं में सिर्फ कहानियों को ही शामिल नहीं किया, बल्कि उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय पीड़ा को भी दर्ज किया जो आज भी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है।

राही मासूम रजा: मुस्लिम लेखक जिसने महाभारत की पटकथा लिखकर साबित किया कि कला धर्म से परे

IANS | March 14, 2026 1:31 PM

नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। बात 1980 के दशक के उत्तरार्ध की है। दूरदर्शन पर बीआर चोपड़ा भारत के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' को पर्दे पर उतारने की तैयारी कर रहे थे। जब यह घोषणा हुई कि इस पवित्र हिंदू महाकाव्य के संवाद एक मुस्लिम लेखक लिखेंगे, तो हंगामा मच गया। सवाल उठा, "क्या कोई हिंदू विद्वान नहीं बचा जो एक मुसलमान हमारे धर्मग्रंथ की पटकथा लिखेगा? उस लेखक ने कोई रक्षात्मक जवाब नहीं दिया, बल्कि एक ऐसी गर्जना की जिसने सभी की बोलती बंद कर दी।

दुनिया को 'उल्टे चश्मे' से देखने वाले कलमकार, जिनका मानना था हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए

IANS | February 28, 2026 9:47 PM

मुंबई, 28 फरवरी (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के हास्य सम्राट तारक जनुभाई मेहता दुनिया को सीधे नहीं, बल्कि 'उल्टे चश्मे' से देखते थे। उनकी कलम ने समाज की कमियों पर हल्का-फुल्का व्यंग्य किया, लेकिन कभी कटुता नहीं अपनाई। उनका मानना था कि हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए, जो हंसाते हुए दिल को छूए और सोचने पर मजबूर करे।

जयंती विशेष: बच्चों को 'पाताल दीदी' जैसी रचना देने वाली रचनाकार, जो कहलाईं बाल साहित्य की जादूगरनी

IANS | February 25, 2026 11:56 PM

नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्ला साहित्य में ऐसे कई रचनाकार हुए, जिनके कलम का जादू आज भी कविता-कहानियों समेत अन्य विधा के रूप में अमर है। ऐसी एक बाल साहित्य की जादूगरनी कहलाईं लीला मजूमदार, उन चुनिंदा महिला साहित्यकारों में से एक, जिन्होंने बच्चों की कहानियों से लेकर वयस्क उपन्यासों तक हर उम्र के पाठकों को अपनी रचना से समृद्ध किया।

स्मृति शेष: कवि जॉन कीट्स, जिनका नाम 'पानी पर लिखा था' और वह इतिहास में अमर हो गए

IANS | February 22, 2026 7:18 PM

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। "मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, और एक जड़ता मुझे घेर रही है…" यह पंक्तियां महान अंग्रेजी रोमांटिक कवि जॉन कीट्स की प्रसिद्ध कविता 'ओड टू अ नाइटिंगेल' का हिंदी भावानुवाद हैं। इन शब्दों में जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मा की गहरी उदासी का स्वर गूंजता है। विडंबना यह रही कि जिस कवि ने जीवन और मृत्यु के रहस्यों को इतनी संवेदनशीलता से उकेरा, वह 25 वर्ष की आयु में 23 फरवरी 1821 को इस दुनिया से विदा हो गया।