यादों में सहाय : हिंदी साहित्य का वो 'वटवृक्ष', जिनके साथ रहे प्रसाद, निराला और दिनकर

IANS | January 20, 2026 8:06 PM

पटना, 20 जनवरी (आईएएनएस)। 9 अगस्त, 1893 को बिहार के बक्सर (तत्कालीन शाहाबाद) जिले के उनवास गांव में एक बालक ने जन्म लिया, जिसे घरवाले प्यार से 'भोलानाथ' पुकारते थे। यही भोलानाथ आगे चलकर आचार्य शिवपूजन सहाय बना।

एडगर एलन पो: आधुनिक रहस्य और हॉरर साहित्य के जनक, जिन्होंने डर को शब्दों में ढाला

IANS | January 18, 2026 7:51 PM

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। एडगर एलन पो अमेरिकी साहित्य के उन विरले लेखकों में हैं जिन्होंने लेखन की दिशा ही बदल दी। उन्हें आधुनिक रहस्य, जासूसी और हॉरर साहित्य का जनक माना जाता है। उनके साहित्य ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में लेखकों और पाठकों की सोच को प्रभावित किया। भय, अवचेतन मन, अपराधबोध और मनोवैज्ञानिक उलझनों को जिस गहराई से पो ने शब्दों में ढाला, वह अपने समय से कहीं आगे था।

महाश्वेता देवी: आदिवासियों और दलितों की आवाज, जिन्होंने अपनी कलम से समाज को दिखाया आईना

IANS | January 13, 2026 9:00 PM

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। आज हम एक ऐसी शख्सियत को याद कर रहे हैं, जिसने अपनी कलम और काम दोनों से समाज के हाशिए पर जी रहे लोगों को आवाज दी और भारतीय साहित्य तथा सामाजिक चेतना में अमिट छाप छोड़ी। उनकी रचनाओं ने सिर्फ साहित्य को समृद्ध नहीं किया, बल्कि उन लोगों की कहानी भी दुनिया के सामने लाई, जो अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते थे।

53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन, धर्मेंद्र प्रधान बोले- भारत दुनिया का तीसरा बड़ा प्रकाशन केंद्र

IANS | January 10, 2026 3:55 PM

नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। भारत मंडपम में 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का भव्य उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने टैम्बोरिन बजाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।

विश्व पुस्तक मेला: साहित्य, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान का सजेगा मंच, भारत मंडपम में 10 जनवरी से शुरुआत

IANS | January 9, 2026 5:11 PM

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। डिजिटल दुनिया में जहां हर चीज मोबाइल, कंप्यूटर से लेकर आपकी मल्टी-फंक्शन टीवी स्क्रीन पर एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती है। उस दौर में भी किताबों का अपना क्रेज है। आज भी किताबों के कद्रदान कम नहीं हैं। कहते हैं, 'किताबें बोलती हैं, आप बीती और जग बीती भी।' इस लिहाज से किताबों के शौकीनों, युवाओं, बच्चों-बूढ़ों से लेकर महिलाओं तक, सभी का इंतजार नई दिल्ली में 'विश्व पुस्तक मेले' में पूरा होने वाला है।

दिल्ली शब्दोत्सव 2026 : प्रतिभागियों ने कहा- शब्दों से जुड़ रहें युवा, हिंदी आज भी युवाओं की भाषा

IANS | January 2, 2026 4:28 PM

नई दिल्ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दिल्ली शब्दोत्सव 2026 का माहौल उत्साह और रचनात्मकता से भरा नजर आ रहा है। आयोजन स्थल पर साहित्य, संगीत और कला का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शब्दों और सुरों के इस उत्सव में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचे और उन्होंने अपनी भागीदारी के अनुभव साझा किए।

यादों में अनवर : भगवद् गीता के उर्दू अनुवादक, मुशायरों के चहेते और सामाजिक सौहार्द के रहे पैरोकार

IANS | January 1, 2026 7:24 PM

नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। साल था 2018 और तारीख थी 2 जनवरी… जब उर्दू शायरी की दुनिया में अजीब सी खामोशी छा गई। इस दिन उस शख्स ने दुनिया को अलविदा कह दिया, जिसकी आवाज ने मुशायरों को रौशन किया, जिसकी कलम ने संस्कृत के श्लोकों को उर्दू के शेरों में ढाला। उस शख्स ने साहित्य को सामाजिक सौहार्द का जरिया बनाया और उनका नाम था अनवर जलालपुरी।

जयंती विशेष : ‘राग दरबारी’ से व्यंग्य को नई ऊंचाई देने वाले रचनाकार

IANS | December 31, 2025 6:59 PM

नई दिल्ली, 31 दिसंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार का नाम लिया जाए तो उसमें श्रीलाल शुक्ल का नाम जरूर आता है। साहित्यकार की 31 दिसंबर को जयंती है। उत्तर प्रदेश, लखनऊ के अतरौली गांव में जन्मे शुक्ल ने अपनी कलम से साबित किया कि व्यंग्य सिर्फ हंसाने का माध्यम नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक मुद्दों को हल्के और प्रभावी अंदाज में सामने लाने का मजबूत जरिया भी है।

यादों में दुष्यंत : 'मसान' की गुजरती रेल, शब्दों में थरथराता 'दिल', तड़प और पीड़ा के रचनाकार की कहानी

IANS | December 29, 2025 9:12 PM

नई दिल्ली, 29 दिसंबर (आईएएनएस)। साल 2015 में बॉलीवुड की फिल्म 'मसान' रिलीज हुई। बनारस, आज के युवाओं के लिए वाराणसी, के बैकड्रॉप पर सेट इस फिल्म के हर संवाद, सीन और गाने लोगों के कानों के रास्ते दिल तक पहुंच गए। एक गाना है, 'तू किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।' यह गाना दुष्यंत कुमार की गजल से लिया गया, जिसने हर उम्र को अपना दीवाना बना लिया।

जयंती विशेष: 'उल्टे चश्मे' से दुनिया देखने वाले तारक मेहता, जिनकी रचनाएं गुदगुदाती हैं

IANS | December 25, 2025 11:51 PM

मुंबई, 25 दिसंबर (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध हास्यकार, कॉलमनिस्ट और नाटककार और एक ऐसे साहित्यकार, जो दुनिया को सीधे नहीं बल्कि उल्टे चश्मे से देखते थे। जी हां, बात हो रही है तारक जनुभाई मेहता की, जिनकी रचनाएं पाठकों, दर्शकों को आज भी खिलखिलाकर हंसने पर मजबूर करती हैं।