विशेष : नारीवाद पर खुलकर बोलने वाली लेखिका प्रभा खेतान, जब खुद की आत्मकथा से साहित्य जगत को चौंकाया

IANS | October 31, 2025 11:32 PM

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। औरतों के लिए दुनिया अजीबो-गरीब रही है। इसको करीब से जीने वालीं महिलाओं में भारतीय-साहित्य की विलक्षण बुद्धिजीवी प्रभा खेतान भी थीं। अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करने वाली आत्मकथा 'अन्या से अनन्या' लिखकर सौम्य और शालीन प्रभा खेतान ने साहित्य जगत को चौंकाया था।

जन्मदिन विशेष : जिनके शब्दों ने हिंदी साहित्य को दी नई दृष्टि, निर्भीक लेखिका मृदुला गर्ग की कहानी

IANS | October 24, 2025 9:03 PM

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य की दुनिया में मृदुला गर्ग एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपने लेखन से न सिर्फ परंपराओं को चुनौती दी बल्कि पाठकों को सोचने पर मजबूर किया। समान रूप से हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लेखन करने वाली मृदुला गर्ग ने लगभग हर विधा में अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया है। आठ उपन्यास, चार नाटक, चार निबंध संग्रह, एक संस्मरण, एक यात्रा वृत्तांत और 90 से अधिक कहानियां, यह उनकी अब तक की सृजन-यात्रा का प्रमाण हैं।

‘मोदीज मिशन’ : वडनगर से प्रधानमंत्री कार्यालय तक के सफर पर किताब होगी लॉन्च

IANS | October 23, 2025 4:27 PM

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असाधारण जिंदगी और राजनीतिक सफर पर लिखी गई बायोग्राफी की लिस्ट में 'मोदीज मिशन' नाम की एक नई किताब भी शामिल होने वाली है। इस किताब को शुक्रवार को मुंबई में लॉन्च किया जाएगा।

विशेष: पद्मश्री प्रो. दिगंबर हांसदा, संविधान का 'ओलचिकी' में किया अनुवाद, 'संथाल' की रहे सशक्त आवाज

IANS | October 15, 2025 4:20 PM

रांची, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। संथाली साहित्य के विमर्श में आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना केंद्र बिंदु में रहे हैं। झारखंड के संथाल परगना में देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और दुमका जैसे जिले शामिल हैं, और यहां की शख्सियतों में डॉ. दिगंबर हांसदा किसी 'पूज्य' व्यक्तित्व से कम नहीं हैं।

पीएम मोदी ने लिखा मेलोनी की आत्मकथा का प्राक्कथन, इटली की पीएम बोलीं- सम्मानित महसूस कर रही हूं

IANS | September 29, 2025 7:01 PM

रोम, 29 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आत्मकथा ‘आई एम जॉर्जिया’ के भारतीय संस्करण का प्राक्कथन लिखा है। पीएम मोदी ने उन्हें एक "असाधारण राजनीतिक नेता बताया, जो विचारों को जोड़ती हैं" और उनकी आत्मकथा को "मन की बात", यानी मन से निकले विचारों की संज्ञा दी।

स्त्री-मन की सशक्त आवाज प्रभा खेतान, हिंदी साहित्य को दिया नया नजरिया

IANS | September 19, 2025 3:05 PM

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य की धरती ऐसी कई सशक्त रचनाकारों से समृद्ध है, जिन्होंने अपनी कलम से स्त्री-मन की गहराइयों को न केवल अच्छे से पेश किया है बल्कि नारी के अंदर की उलझनों को बहुत खूबसूरती से उकेरने का काम किया है। इनमें डॉ. प्रभा खेतान एक खास नाम हैं, जो कविता से भावनाओं की दुनिया बनाती हैं। साथ ही आलोचना, निबंध और साहित्यिक नारीवादी विचारों से हिंदी साहित्य को नई दिशा देती हैं।

साहित्य के 'नारायण' : 'अंतिम ऊंचाई' से 'अबकी बार लौटने' का वादा करने वाले कुंवर

IANS | September 18, 2025 4:04 PM

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। जिंदगी की जद्दोजहद से जूझ रहे आज के युवाओं को साहित्य भी रास्ता दिखा सकता है। कुंवर नारायण की 'अंतिम ऊंचाई' और 'अबकी बार लौटा' कविताएं सिर्फ चंद शब्द नहीं हैं, यह हमारी जिंदगी के सपनों को पाने की अंधाधुंध दौड़ में ठहरकर हमें जो हासिल है, उसके जश्न को मनाने की भी सीख देती हैं।

लखनऊ पुस्तक मेले में आकर्षण का केंद्र बनी 'पॉकेट गीता' और 'पीएम मोदी कटआउट बुक'

IANS | September 12, 2025 4:44 PM

लखनऊ, 12 सितंबर (आईएएनएस)। लखनऊ के हज़रतगंज स्थित बलरामपुर गार्डन में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस साल गुजरात के अहमदाबाद से आए प्रकाशक अपूर्व शाह की दो अनोखी किताबें लोगों का ध्यान खींच रही हैं। इनमें एक है दुनिया की सबसे छोटी 'श्रीमद्भगवद् गीता' और दूसरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित एक खास 'कटआउट बुक' है।

बर्थडे स्पेशल: 'काकाबाबू' के जासूसी किरदार से भरा रोमांच, पहला उपन्यास लिखकर डर गए थे सुनील गंगोपाध्याय

IANS | September 6, 2025 3:02 PM

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। बंगाली साहित्य के सबसे प्रसिद्ध और बहुआयामी लेखकों में से एक, सुनील गंगोपाध्याय ने बंगाली साहित्य की दुनिया में बतौर कवि प्रवेश किया था। 1953 में उन्होंने कृत्तिबास नाम की पत्रिका की शुरुआत की, जो बाद में युवा कवियों के लिए एक मंच बन गई। इसके बाद 1965 में उन्होंने पहला उपन्यास 'आत्मप्रकाश' लिखा, लेकिन कवि से उपन्यासकार बनने का अनुभव उनके लिए डरावना था।

दुष्यंत कुमार: सामाजिक चेतना की बुलंद आवाज, जिनकी कविताएं करती थीं सत्ता से सवाल

IANS | August 31, 2025 6:20 PM

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। 'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।' इस कविता को पढ़ते ही मन में आम आदमी की गहरी पीड़ा, अंतहीन संघर्ष और उबलते आक्रोश की तस्वीर सामने आती है। दुष्यंत कुमार ने इन पंक्तियों में न केवल भावनाओं को उकेरा, बल्कि समाज में बदलाव की तीव्र चाह को भी आवाज दी।