'आरएसएस को राजनीतिक चश्मे से नहीं, सेवा कार्यों से समझें', 'हंड्रेड ईयर्स यंग' की लेखिका रश्मि सामंत

IANS | October 18, 2026 6:33 PM

नई दिल्‍ली, 18 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) असल में सेवा पर आधारित संगठन है, जहां सेवा ही सबसे बड़ा कर्तव्य है। आरएसएस को लेकर बहुत गलतफहमियां हैं और इसे लगभग पूरी तरह से एक राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। जिन लोगों ने इस संगठन के साथ काम किया है या इसके संपर्क में रहे हैं, उनका अनुभव बहुत सकारात्मक रहा है। ये बातें 'हंड्रेड ईयर्स यंग : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' की लेखिका रश्मि सामंत ने आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान कही।

लेखिका शुभ्रा सक्सेना की नई पुस्तक 'इट मैटर्स अ लॉट' लॉन्च, जीवन के अर्थ पर करती है चिंतन

IANS | October 16, 2026 7:51 PM

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। लेखिका शुभ्रा सक्सेना की नई किताब 'इट मैटर्स अ लॉट' आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गई है। परम पावन दलाई लामा द्वारा लिखी गई प्रस्तावना वाली यह किताब पाठकों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है कि जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है।

कनाडाई लेखिका कार्सन को 'बेबाक और नए प्रयोग' के लिए मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार

IANS | October 8, 2026 5:12 PM

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। साहित्य नोबेल पुरस्कार 2026 का ऐलान गुरुवार को किया गया। स्वीडिश अकादमी ने इस साल ये सम्मान कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को दिया है।

'हिंदी में शुद्ध-अशुद्ध जैसा कुछ नहीं', भाषा के बदलते रूप पर पत्रकार और लेखक अनंत विजय की राय

IANS | September 15, 2026 3:13 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी को लेकर अक्सर एक बहस सुनने के लिए मिलती है कि हिंदी का शुद्ध रूप क्या है? कौन-सा शब्द हिंदी का है और कौन-सा नहीं? क्या अंग्रेजी या दूसरी भारतीय भाषाओं के शब्दों के इस्तेमाल से हिंदी कमजोर हो रही है? क्या सोशल मीडिया और रोमन लिपि हिंदी के भविष्य के लिए चुनौती बन रहे हैं? इन सवालों पर पत्रकार और लेखक अनंत विजय की राय कुछ अलग है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हिंदी को शुद्ध और अशुद्ध के खांचे में बांटना ही सही तरीका नहीं है। हिंदी में शुद्ध-अशुद्ध जैसा कुछ नहीं, बल्कि परिचित और अपरिचित शब्द होते हैं।

हिंदी दिवस विशेष: लेखिका अंकिता जैन बोलीं- फोन या लैपटॉप के एक सिस्टम की तरह भाषा हमेशा अपग्रेड हो रही है

IANS | September 15, 2026 3:07 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ने वाली हिंदी भाषा ने देश की बहुसंख्यक आबादी तक अपनी पहुंच बनाई। हिंदी दिवस पर आईएएनएस ने लेखिका अंकित जैन से बातचीत की।

हिंदी दिवस विशेष: नई हिंदी को जन्मे 13-14 वर्ष हो गए हैं, वह अपने किशोरावस्था में है- शैलेश भारतवासी

IANS | September 15, 2026 1:57 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी सोमवार को धूमधाम से हिंदी दिवस मनाया गया। वैश्विक स्तर पर हिंदी, तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समाहित किया हुआ है। इस खास मौके पर आईएएनएस ने लेखक शैलेश भारतवासी से विशेष बातचीत की।

हिंदी से हिंग्लिश तक : लेखिका ने बताया- क्या यह क्षरण है या किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास

IANS | September 15, 2026 1:09 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की स्मृतियों, भावनाओं, अनुभवों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। समय के साथ समाज बदला, लोगों की जीवनशैली बदली, संचार के माध्यम बदले और उसके साथ हिंदी भी बदलती गई। कभी साहित्य और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से पहचानी जाने वाली हिंदी आज अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, स्थानीय बोलियों और इंटरनेट की भाषा के साथ कदमताल करती दिखाई देती है। ऐसे में यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि क्या यह हिंदी का क्षरण है या फिर किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास?

जब दूसरी भाषाओं से शब्द उधार लेती रही है हिंदी, तो आखिर क्या है 'शुद्ध हिंदी'?

IANS | September 14, 2026 6:07 PM

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पहले 'शुद्ध' और 'सही' हिंदी की चाबी कुछ गिने-चुने संपादकों, आचार्यों और पाठ्यपुस्तक निर्माताओं के हाथ में थी। भाषा ऊपर से नीचे तय होती थी। आज नए शब्द और नई शब्दावली लोग सोशल मीडिया पर खुद गढ़ रहे हैं।

हिंदी से 'हिंग्लिश' तक, क्या हम एक 'नई हिंदी' के जन्म के दौर में हैं?

IANS | September 14, 2026 5:44 PM

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भाषा ही एक ऐसी कड़ी है, जो हमें अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है। हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन-दृष्टि को लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। यही भाषाई बहुलता भारत की 'विविधता में एकता' की भावना को सशक्त बनाती है।

किसी भी दौर में भाषा नई होती जाती है, अगर ऐसा नहीं होगा तो वो मर जाएगी : नीलोत्पल मृणाल

IANS | September 14, 2026 5:03 PM

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी हुई ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समेटा है। हिंदी साहित्य ने ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ा, जिससे इसकी जड़ें गांवों और आम जन तक पहुंचीं। हिंदी दिवस के अवसर पर आईएएनएस ने लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल से खास बातचीत की।