यादों में हेडगेवार : कैसे एक मेडिकल छात्र बन गया दुनिया के सबसे बड़े संगठन का शिल्पकार
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। 1 अप्रैल 1889 को नागपुर के एक संभ्रांत ब्राह्मण परिवार में जन्मे केशव बलिराम हेडगेवार ने बहुत कम उम्र में मौत का सबसे खौफनाक चेहरा देखा था। साल 1902 में नागपुर में प्लेग की महामारी फैली थी। उनके माता-पिता ने बिना अपनी जान की परवाह किए मरीजों की सेवा की और इसी कोशिश में दोनों संक्रमित हो गए। महज 13 साल की उम्र में केशव ने एक ही दिन अपने माता-पिता दोनों की चिताओं को एक साथ जलते देखा।