नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही मौसम में चिपचिपापन भी शुरू हो जाता है, जो बालों और स्किन को बुरी तरीके से प्रभावित करता है।
बाल उमस और पसीने की वजह से चिपचिपे होने लगते हैं और पसीने की वजह से आम दिनों की तुलना में ज्यादा झड़ते हैं। ऐसे में गर्मियों के दिनों में बालों की देखभाल करना जरूरी है।
आयुर्वेद में केशों की देखभाल केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के आंतरिक संतुलन, पोषण, और जीवनशैली का प्रतिबिंब है। भागदौड़ भरी जिंदगी में, जीवनशैली में सुधार के साथ, प्रकृति की गोद में मिली कुछ जड़ी-बूटियों के जरिए बालों को गहराई से पोषण दिया जा सकता है। हम आपको आयुर्वेद में वर्णित कुछ ऐसी जड़ी-बूटियों के माध्यम से बने तेलों के बारे में बताएंगे, जो बालों की रंगत सुधारने से लेकर बालों को कई चमक भी देते हैं।
इसके लिए आंवला चूर्ण, कड़ी पत्ता, नारियल तेल और मेथी दाना को धीमी आंच पर उबाल लें। नारियल तेल में रंग में परिवर्तन के बाद तेल को कांच के बर्तन में छान कर रख लें। यह तेल बालों को पोषण देता है, बालों की चमक को बरकरार रखता है, रूसी को कम करता है और उन्हें मुलायम भी बनाता है। इस तेल का इस्तेमाल हफ्ते में 2 बार करें।
दूसरा तरीका है, आंवला चूर्ण, भृंगराज चूर्ण, ब्राह्मी चूर्ण, जटामांसी चूर्ण, और तिल के तेल को धीमी आंच पर उबालें। रंग में परिवर्तन और सभी चीजों के पक जाने के बाद तेल को छानकर रख लें। यह तेल बालों के झड़ने की समस्या से छुटकारा दिलाता है, बालों में जमी गंदगी को साफ करता है, मानसिक तनाव से भी राहत देता है, और समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है।
हफ्ते में तीन बार इस तेल को गुनगुना करके बालों में लगाएं, और अगर आपकी स्कैल्प ऑयली है तो हफ्ते में दो बार तेल मालिश के बाद बालों को अच्छे से शैम्पू से धो लें। कुछ ही महीनों में बालों में आए बदलाव खुद नज़र आने लगेंगे। इसके साथ शरीर को हाइड्रेटेड रखें और ओमेगा-3 और विटामिन ई की कमी शरीर में न होने दें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस