IANS
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January 24, 2026 9:04 PM
नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। स्वतंत्र भारत की राजनीति में कुछ रिश्ते रणनीति से शुरू होकर टकराव पर खत्म होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया का संबंध कांग्रेस के साथ रहा। एक ओर कांग्रेस को ग्वालियर रियासत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सिंधिया घराने का सहारा चाहिए था, तो दूसरी ओर राजमाता विजयाराजे सिंधिया राजनीति में प्रवेश ही नहीं करना चाहती थीं। जवाहरलाल नेहरू के विशेष आग्रह पर जिस रिश्ते की शुरुआत मजबूरी और समझौते से हुई, वही आगे चलकर वैचारिक मतभेद, सत्ता संघर्ष और व्यक्तिगत टकराव के कारण खुली राजनीतिक दुश्मनी में बदल गया। यही संबंध भारतीय राजनीति में कांग्रेस बनाम राजमाता की उस कहानी की नींव बना, जिसने मध्य प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक कई सत्ता समीकरण बदल दिए।