ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने से सामाजिक सुरक्षा को मिलेगा विस्तार, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा होगी मजबूत: उद्योग संगठन

IANS | September 17, 2026 7:30 PM

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह किए जाने के फैसले का उद्योग जगत और श्रमिक संगठनों ने स्वागत किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि यह कदम सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करने, औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विश्व बांस दिवस : सिर्फ घास नहीं, 'ग्रीन स्टील' है बांस, पर्यावरण में भी खास योगदान

IANS | September 17, 2026 5:32 PM

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। बांस का उपयोग घर-निर्माण से लेकर सजावट, हस्तशिल्प, औषधि और पर्यावरण संरक्षण तक अनगिनत क्षेत्रों में होता है। प्रकृति के इस लचीले, टिकाऊ और चमत्कारिक संसाधन की अपार संभावनाओं को मान्यता देने तथा वैश्विक स्तर पर इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही प्रतिवर्ष 18 सितंबर को 'विश्व बांस दिवस' मनाया जाता है।

बंगाल: अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों ने पीएम मोदी को 'बर्थडे गिफ्ट' के तौर पर पौधा लगाया

IANS | September 16, 2026 11:52 PM

कोलकाता, 16 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन मनाने के लिए देशव्यापी अभियान से पहले, विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी भी प्रधानमंत्री को बधाई देने और उन्हें अपने-अपने तरीके से तोहफे देने के लिए आगे आ रहे हैं।

ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ने से देश के श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का व्यापक कवच: डॉ. मनसुख मांडविया

IANS | September 16, 2026 6:22 PM

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने की मंजूरी दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

पीएम मोदी की अनवरत यात्रा : मंच से मोबाइल स्क्रीन तक दौर बदले, संवाद बदला, सफर जारी रहा

IANS | September 16, 2026 3:05 PM

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। 'फ्रेंड्स'- यह महज एक शब्द नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस नई संवाद शैली का सूत्रपात था, जिसने हाल ही में 'जेन-जी' (युवा पीढ़ी) के रोष को लेकर बनाए गए विरोधियों के हर नैरेटिव को एक झटके में ध्वस्त कर दिया। यह बड़े-बड़े मंचों से निकलकर मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचे बदलते दौर का बदला हुआ संवाद था। हालांकि, इस नए माध्यम में भी उनका अंदाज और परिणाम वही रहा, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। एक ऐसा नेतृत्व जिसे राजनीतिक रूप से पस्त करना लगभग असंभव रहा है। गुजरात से शुरू होकर दिल्ली के तख्त तक पहुंचा उनका अजेय राजनीतिक सफर इस बात का गवाह है।

जेनजी का गणपति सेलिब्रेशन, हंगामा और हुड़दंग नहीं, सांस्कृतिक मूल्य और धार्मिक अनुष्ठान सबसे पहले

IANS | September 15, 2026 9:03 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। सोशल मीडिया, इंटरनेट और वर्चुअल वर्ल्ड में 'जेनजी' शब्द अचानक नहीं आया। इसका एक लंबा अरसा रहा है। देश-दुनिया में पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं हुईं, जिसने जेनजी को मेनस्ट्रीम मीडिया, चर्चा और बयानों में भी शामिल कर दिया।

महाराष्‍ट्र : सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना ने बदली प्रगतिशील किसान की तकदीर, साल में दो फसल और 3.5 लाख रुपए तक की उपज

IANS | September 15, 2026 6:00 PM

गढ़चिरौली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की योजना के तहत 'मागेल त्याला सौर ऊर्जा कृषि पंप योजना' का लाभ मिलने के बाद कोरची तहसील के प्रगतिशील किसान अशोक कराडे की खेती में बड़ा बदलाव आया है।

हिंग्लिश हिंदी का अंत नहीं, नई यात्रा का पड़ाव : अवधेश वर्मा

IANS | September 15, 2026 3:52 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। क्या सचमुच हमारी मातृभाषा पतन की ओर है या हम एक नई, आधुनिक हिंदी के जन्म के चश्मदीद गवाह बन रहे हैं? मौजूदा समय में हिंदी भाषा देवनागरी की मोहताज नहीं रही, बल्कि रोमन और हिंग्लिश में भी अपने पंख पसार रही है।

हिंदी दिवस विशेष : बदलाव के हर दौर को समेटकर और भी मजबूत हो रही हमारी मातृभाषा

IANS | September 15, 2026 1:39 PM

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी के लिए कहा जाता है कि वह 'सदा नीरा' है। इसका तात्पर्य है कि एक ऐसी नदी जो हमेशा बहती रहती है और अपने रास्तों से नए-नए शब्दों को समेटती चलती है। बीते दिन ही 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' मनाया गया है। आज, यह सवाल जनमानस से लेकर साहित्यकारों तक को मथ रहा है कि क्लासिक हिंदी और आधुनिक हिंदी के बीच का यह फासला कहीं भाषा का पतन तो नहीं है। आज की हिंदी में उर्दू, स्थानीय बोलियों के साथ-साथ अंग्रेजी और इंटरनेट स्लैंग की ऐसी घुसपैठ हुई है कि देवनागरी का संसार अब रोमन लिपि के कीपैड तक सिमटता दिख रहा है।

जब दूसरी भाषाओं से शब्द उधार लेती रही है हिंदी, तो आखिर क्या है 'शुद्ध हिंदी'?

IANS | September 14, 2026 6:07 PM

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पहले 'शुद्ध' और 'सही' हिंदी की चाबी कुछ गिने-चुने संपादकों, आचार्यों और पाठ्यपुस्तक निर्माताओं के हाथ में थी। भाषा ऊपर से नीचे तय होती थी। आज नए शब्द और नई शब्दावली लोग सोशल मीडिया पर खुद गढ़ रहे हैं।