जब पिता के निधन के बाद टूट गए थे एल. सुब्रमण्यम, एक साल तक नहीं छुआ वायलिन
नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। कुछ कलाकार अपनी कला से पहचान बनाते हैं और कुछ अपनी कला को नई पहचान देते हैं। एल. सुब्रमण्यम भी ऐसे कलाकारों में शामिल हैं, जिन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत का 'पगनिनी' कहा गया। संगीत के माध्यम से सत्य, सौंदर्य और उनके बीच छिपी अनंत संभावनाओं की खोज आज भी उनके जीवन का मूल स्वर है। यही कारण है कि छह दशकों से अधिक लंबे करियर के बाद भी एल. सुब्रमण्यम दुनिया के सबसे सम्मानित संगीतकारों में गिने जाते हैं।