नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। नींद एक बुनियादी आवश्यकता है, जैसे खाना, पानी और सांस लेना। आजकल लाखों लोग नींद की कमी या अभाव से जूझ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य, कामकाज और सुरक्षा प्रभावित होती है। नींद शरीर और दिमाग को रिचार्ज करती है। नींद की कमी या स्लीप डेफिशिएंसी तब होती है, जब व्यक्ति को जरूरत के अनुसार पर्याप्त नींद नहीं मिलती। नींद का अभाव यानी स्लीप डेप्रिवेशन और भी गंभीर होता है।
इसमें पर्याप्त नींद न मिलना, दिन के गलत समय पर सोना, जैसे शिफ्ट वर्क, अच्छी गुणवत्ता वाली नींद न मिलना, या कोई स्लीप डिसऑर्डर जैसे अनिद्रा, स्लीप एप्निया, जो नींद बिगाड़ता हो आदि शामिल है।
नींद का अभाव काम, पढ़ाई, ड्राइविंग और सामाजिक जीवन में बाधा डालता है। इससे ध्यान केंद्रित करने, सीखने, प्रतिक्रिया देने में मुश्किल होती है। व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को समझने में असमर्थ हो जाता है, चिड़चिड़ा, निराश या चिंतित महसूस करता है। बच्चों में नींद की कमी अलग दिखती है। वे ध्यान की कमी, दुर्व्यवहार या स्कूल में खराब प्रदर्शन कर सकते हैं। वहीं, वयस्कों में थकान, सिरदर्द और मूड स्विंग्स आम हैं।
लंबे समय तक इसका प्रभाव और भी गंभीर असर डालता है। इसमें नींद का अभाव हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्ट्रोक, मोटापा, किडनी की बीमारी और अवसाद से जुड़ा है। यह चोटों का खतरा बढ़ाता है, नींद आने पर गाड़ी चलाना शराब से भी खतरनाक हो सकता है। बुजुर्गों में गिरने और हड्डी टूटने की संभावना बढ़ती है।
नींद को लेकर एक आम गलतफहमी है कि कम नींद में भी आदत पड़ जाती है और इसका कोई नुकसान नहीं होता। शोध बताते हैं कि पर्याप्त और अच्छी नींद मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य, जीवन गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए जरूरी है। नींद की कमी को दूर करने के आसान उपाय पर ध्यान देना चाहिए।
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, रोज एक ही समय पर सोएं और उठें, वीकेंड पर भी। सोने से 1-2 घंटे पहले स्क्रीन जैसे मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर दें। बेडरूम को अंधेरा, शांत और ठंडा रखें। कैफीन जैसे चाय, कॉफी शाम के बाद न लें। नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से 5-6 घंटे पहले। सोने से पहले आरामदायक रूटीन अपनाएं, गर्म स्नान, किताब पढ़ना या ध्यान करना। तनाव कम करने के लिए योग या गहरी सांस लें। अगर समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लें।
--आईएएनएस
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