मुंबई, 17 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ अपने अभिनय से ही नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी के फैसलों से भी लोगों को प्रभावित किया है। रत्ना पाठक शाह उन्हीं में से एक हैं। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली रत्ना ने शादी को लेकर कई इंटरव्यू में बताया है कि उनके पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। हालांकि, उन्होंने अपने प्यार और विश्वास के दम पर हर मुश्किल को पार किया और आज उनकी जिंदगी एक मिसाल मानी जाती है।
18 मार्च 1957 को मुंबई में जन्मीं रत्ना पाठक एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां अभिनय का गहरा रिश्ता रहा है। उनकी मां दीना पाठक हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। बचपन से ही घर में कला और अभिनय का माहौल था, लेकिन इसके बावजूद रत्ना का सपना फिल्मों में आने का नहीं था। वह पायलट या एयरहोस्टेस बनना चाहती थीं। समय के साथ उनकी रुचि बदली और उन्होंने थिएटर का रुख किया, जहां से उनके अभिनय का सफर शुरू हुआ।
थिएटर के दौरान ही उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से हुई। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। जब रत्ना ने अपने घर में इस रिश्ते के बारे में बताया, तो उनके पिता इसके खिलाफ हो गए। रत्ना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता की चिंता धर्म से ज्यादा उनकी बेटी के भविष्य से जुड़ी थी, क्योंकि उस समय वह आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थीं। यही वजह थी कि वह शादी को लेकर आश्वस्त नहीं थे।
इन मुश्किलों के बावजूद रत्ना और नसीरुद्दीन शाह ने अपने रिश्ते को कायम रखा और आखिरकार साल 1982 में शादी कर ली। यह शादी बेहद सादगी से हुई थी। दोनों अलग-अलग धर्म से थे और उम्र में भी करीब 13 साल का अंतर था, लेकिन इन सबके बावजूद उनका रिश्ता मजबूत बना रहा। शादी के बाद रत्ना ने दो बेटे, इमाद शाह और विवान शाह, को जन्म दिया।
रत्ना पाठक शाह के करियर की बात करें तो उन्होंने साल 1983 में फिल्म 'मंडी' से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 'मिर्च मसाला' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। वह सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि टीवी की दुनिया में भी उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की। उनका 'साराभाई वर्सेस साराभाई' में 'माया साराभाई' का किरदार घर-घर में लोकप्रिय रहा।
उन्होंने अपने करियर में 'जाने तू या जाने ना', 'गोलमाल 3', 'खूबसूरत', 'कपूर एंड सन्स', 'लिपस्टिक अंडर माई बुरखा' और 'थप्पड़' जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। खासतौर पर 'लिपस्टिक अंडर माई बुरखा' में उनके किरदार को काफी सराहा गया और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड में नॉमिनेशन भी मिला।
रत्ना पाठक शाह ने हमेशा ऐसे किरदार चुने जो समाज को कुछ संदेश देते हैं। वह महिलाओं के अधिकार और उनकी आजादी को लेकर खुलकर बोलती रही हैं। वह इंडस्ट्री की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने दम पर एक अलग पहचान बनाई है।
--आईएएनएस
पीके/एबीएम