जब सन्नाटे ने शासन बदला और चेकोस्लोवाकिया ने करवट ली, 'वेल्वेट क्रांति' ने सबको चौंका दिया
नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। 1989 का साल पूर्वी यूरोप के लिए किसी जागरण से कम नहीं था। बर्लिन की दीवार गिर चुकी थी, सोवियत संघ की पकड़ ढीली पड़ रही थी, और लोगों के भीतर दशकों से दबा हुआ लोकतंत्र का सपना करवट ले रहा था। उसी दौर में, चेकोस्लोवाकिया में एक क्रांति हुई। लेकिन यह कोई सामान्य क्रांति नहीं थी। इसमें न बंदूक चली, न खून बहा। यह क्रांति थी मखमली-नरम, फिर भी इतनी प्रबल कि उसने पूरे शासन को बदल दिया।