साहित्य के दो साधक : हरिशंकर शर्मा के व्यंग्य बाण तो हजारी प्रसाद द्विवेदी ने पढ़ाया आत्मसम्मान का पाठ
नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। 19 अगस्त की तिथि वह दिन है जब हिंदी साहित्य को दो ऐसी महान विभूतियां प्राप्त हुईं, जिन्होंने अपनी रचनाधर्मिता और जीवटता से समाज को नई दिशा दी। एक ओर, जहां हरिशंकर शर्मा ने अपनी लेखनी और जीवन को सीधे तौर पर ब्रिटिश हुकूमत और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक हथियार बनाया, वहीं दूसरी ओर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपनी मेधा से भारतीय संस्कृति और इतिहास की गहराइयों में छिपे मानवतावादी सूत्रों को खोजकर आधुनिक समाज को आत्मसम्मान और करुणा का पाठ पढ़ाया।