अमरकंटक: जहां से निकलती है मोक्षदायिनी नर्मदा, पितरों को मिलता है 'अक्षय तर्पण'
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। स्कंद पुराण के रेवा खंड में एक श्लोक का उल्लेख मिलता है, जो नदियों की पावनता को एक अद्भुत परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करता है। "त्रिभिः सारस्वतं तोयं सप्ताहेन तु यामुनम्। सद्यः पुनाति गांगेयं, दर्शनादेव नार्मदम्॥" इस सूक्ति का अभिप्राय यह है कि सरस्वती का जल तीन दिन के स्नान से, कालिंदी यमुना का जल एक सप्ताह के स्नान से और पतितपावनी गंगा का जल स्पर्श करते ही या तत्काल स्नान मनुष्य को पवित्र कर देता है। किंतु, नर्मदा का आध्यात्मिक प्रताप इतना अलौकिक है कि इसके केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और वह पवित्र हो जाता है।