दिल्ली शब्दोत्सव 2026: हम कौन हैं, यह समझे बिना अपनी प्राथमिकता और दिशा तय नहीं कर सकते: डॉ. मनमोहन वैद्य

दिल्ली शब्दोत्सव 2026: हम कौन हैं, यह समझे बिना अपनी प्राथमिकता और दिशा तय नहीं कर सकते: डॉ. मनमोहन वैद्य

नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली शब्दोत्सव 2026 कार्यक्रम में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय अवधारणा विषय पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि हर भारतीय को पहले यह समझना होगा कि हम क्या हैं?

सिर्फ भाजपा को ही शीर्ष तक नहीं पहुंचाया, बल्कि राम मंदिर आंदोलन में भी निभाई थी अहम भूमिका, ऐसी है मुरली मनोहर जोशी की कहानी

January 4, 2026 9:12 PM

नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। मुरली मनोहर जोशी, एक ऐसी शख्सियत जिनके बिना एक दौर में भारतीय जनता पार्टी का वह नारा अधूरा था, जिसे पार्टी के कार्यकर्ता लगाया करते थे और कहते थे, 'भारत मां की तीन धरोहर, अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर।' और यही वजह है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की बात अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के साथ-साथ मुरली मनोहर जोशी के बिना नहीं की जा सकती।

ब्रेल डे स्पेशल: 'स्पर्श' से 'श्रीकांत' तक, ब्लाइंड रोल में चमके ये सितारे, कई ने सीखी ब्रेल लिपि

January 4, 2026 9:07 PM

मुंबई, 4 जनवरी (आईएएनएस)। हर साल 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने दृष्टिहीनों के लिए स्पर्श से पढ़ने-लिखने का माध्यम दिया। बॉलीवुड में कई फिल्मों ने ब्लाइंड किरदारों की जिंदगी को गहराई से दिखाया है। इन रोल को जीवंत बनाने के लिए कई एक्टर्स ने ब्रेल लिपि सीखी और दृष्टिहीनों की दुनिया को समझा। ऐसे किरदारों ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि दिव्यांगों के संघर्ष और ताकत को भी उजागर किया।

मंसूर अली खान पटौदी: शाही परिवार में जन्मे 'नवाब', जिन्होंने बतौर कप्तान टीम इंडिया में भरी नई ऊर्जा

January 4, 2026 9:22 PM

नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। मंसूर अली खान पटौदी की गिनती भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में होती है। 5 जनवरी 1941 को भोपाल के शाही खानदान में जन्मे पटौदी ने महज 21 साल की उम्र में टीम इंडिया की कमान संभाली। उनकी आक्रामक सोच, फिटनेस पर जोर और नेतृत्व ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई। अपने पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी के नक्शेकदम पर चलते हुए मंसूर अली खान ने न सिर्फ भारत की ओर से क्रिकेट खेला, बल्कि कप्तानी भी की।