बिरजू महाराज: नृत्य से जब मंच पर चला दी थी ट्रेन, घुंघरुओं में बोलती थी कथक की आत्मा
मुंबई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। शाम का वक्त था, लखनऊ के एक पुराने घर के आंगन में सात-आठ साल का एक दुबला-पतला बालक अपने पैरों में बंधे भारी घुंघरुओं के साथ कुछ ऐसी जुगलबंदी कर रहा था कि वहां मौजूद उस्ताद भी दंग रह गए। उस बच्चे के पैर जमीन पर नहीं, बल्कि ताल के उस बारीक धागे पर थिरक रहे थे जिसे पकड़ना बड़े-बड़े दिग्गजों के बस की बात नहीं होती। यह बालक कोई और नहीं, बल्कि भविष्य के 'कथक सम्राट' पंडित बिरजू महाराज थे।