IANS
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July 22, 2026 5:11 PM
नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। 15 वर्ष के एक साधारण से दिखने वाले बच्चे को जब ब्रिटिश मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, तो उसके निर्भीक उत्तरों ने भारतीय इतिहास की दिशा ही बदल दी। यह घटना 1921 के असहयोग आंदोलन के दौरान की है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, जब मजिस्ट्रेट ने उस बच्चे से उसका नाम पूछा, तो उसने निडरता से अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्र', और अपना पता 'जेल' बताया। सजा के तौर पर जब उसके शरीर पर 15 कोड़े बरसाए गए, तो हर कोड़े की मार पर दर्द से कराहने के बजाय उस बच्चे ने 'भारत माता की जय' का उद्घोष किया। इसी अदम्य साहस ने चंद्रशेखर तिवारी को हमेशा के लिए 'चंद्रशेखर आजाद' बना दिया। यह उनके जीवन का वह निर्णायक मोड़ था, जिसने एक युवा छात्र को सशस्त्र क्रांति के महानायक में परिवर्तित कर दिया।