साहित्य के 'सुदामा': रोटी से सत्ता और सरकार को चुनौती, संसद के मौन पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। 10 फरवरी की तारीख हिंदी कविता के एक सशक्त और असाधारण आवाज को याद करने की है, जो इस दिन शांत हो गया था। महज 39 वर्ष की उम्र में सुदामा पांडेय का ब्रेन ट्यूमर से निधन हो गया, लेकिन इतने छोटे जीवन में उन्होंने हिंदी कविता को जो तेवर, भाषा और दृष्टि दी, उसने उन्हें साठोत्तरी कविता के सबसे प्रभावशाली कवियों में शामिल कर दिया।