वर्ल्ड-रेबीज डे की थीम खास, डब्ल्यूएचओ ने सबकी सहभागिता को बताया अहम

IANS | September 21, 2025 8:19 PM

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। इस वर्ष 28 सितंबर को 19वां विश्व रेबीज दिवस मनाया जाएगा। इस बार का थीम 'एक्ट नाउ: यू, मी एंड कम्युनिटी' है। यानि सबको मिलजुलकर इस बीमारी का एक साथ समझदारी से सामना करना है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक अपने 19 साल के इतिहास में पहली बार, विश्व रेबीज दिवस की थीम में "रेबीज" शब्द शामिल नहीं है।

ब्रश के तुरंत बाद चाय क्यों नहीं पीनी चाहिए? जानिए एक आम सी लेकिन जरूरी बात!

IANS | September 20, 2025 4:13 PM

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। लगभग हर भारतीय के सुबह की शुरुआत एक प्याली चाय से होती है। ग्रीन हो, ब्लैक हो या फिर मिल्क टी, ये तो जैसे अभिन्न अंग है हमारे जीवन का। दिलो दिमाग में अक्सर एक ख्याल आता है कि बेड टी बेहतर है या टूथब्रश के तुरंत बाद चाय पीना बेहतर है। अमूमन सुबह ब्रश करने के कुछ पल बाद ही लोग चाय पीते हैं, लेकिन क्या ये दांतों के लिए ठीक है?

'एनसीडी' ऐसी बीमारियां हैं जो दिखती नहीं, लेकिन मारती जरूर हैं: डब्ल्यूएचओ ने चेताया

IANS | September 20, 2025 3:41 PM

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। आजकल जिंदगी की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि न किसी के पास खाने का वक्त है, न सोने की फिक्र और न अपनों संग बैठकर दो पल बिताने की सुध! लोग दिन भर की थकान को कोल्ड ड्रिंक से धोते हैं, स्ट्रेस को सिगरेट के छल्लों में उड़ाते हैं या शराब में घोल कर पी जाते हैं। ऊपर से काम का प्रेशर, सोशल मीडिया की दौड़ और रिश्तों की उलझनें। इसी का नतीजा है कि कुछ ऐसी बीमारियां शरीर में प्रवेश कर रही हैं जिनके लक्षण प्रत्यक्ष तौर पर दिखते नहीं हैं। बीमारियां जो दिखती नहीं हैं लेकिन भीतर ही भीतर शरीर को खोखला करती रहती हैं। इन्हें ही कहा जाता है एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) यानी गैर संचारी रोग।

कितनी देर तक चबानी चाहिए च्युइंग गम? साइंस ने खोजा टाइमिंग का फॉर्मूला!

IANS | September 20, 2025 2:07 PM

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। च्युइंग गम कइयों के लिए टाइम पास है, तो कुछ इसे माउथ फ्रेशनर के तौर पर यूज करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि च्युइंग गम कितनी देर तक चबाना सही होता है?

नींद और सेहत का सुपरस्टार हार्मोन 'मेलाटोनिन'! रिसर्च क्या कहती है?

IANS | September 17, 2025 4:05 PM

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जिसे हमारा मस्तिष्क, खासकर पीनियल ग्रंथि, अंधेरे में उत्पन्न करता है। इसे अक्सर “नींद का हार्मोन” कहा जाता है क्योंकि यह हमारे 'स्लीप-वेक सायकल' यानी 'नींद-जागने की लय' (सर्केडियन रिदम) को नियंत्रित करता है।

याददाश्त नहीं पड़ेगी कमजोर, बस कुछ बातों का रखें ख्याल

IANS | September 17, 2025 2:20 PM

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे है, एक ऐसी बीमारी जो बढ़ती उम्र के साथ बढ़ते मेमोरी लॉस से जुड़ी है। समय के साथ याददाश्त को बनाए रखना जरूरी है, और ये सब कुछ ब्रेन हेल्थ से जुड़ा है। मस्तिष्क की सेहत सही रही तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा। कुछ रिसर्च दावा करते हैं कि आहार, व्यायाम और ध्यान सहित कुछ कसरतों को डेली रूटीन में शामिल किया तो याददाश्त कमजोर नहीं पड़ेगी।

ज्यादा सोने के फायदे कम नहीं, रिसर्च में दावा मूड रहता है फ्रेश

IANS | September 16, 2025 6:09 PM

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। थोड़ा अजीब लग सकता है कि 'ज्यादा सोना' भी किसी के लिए फायदेमंद हो सकता है। आज के समय में जहां लोग कम सोने को “प्रोडक्टिव” मानते हैं, वहां ये जानकर आपको हैरानी हो सकती है कि कभी-कभी ज्यादा नींद लेना आपके शरीर और दिमाग के लिए किसी वरदान से कम नहीं।

ज्वाला गुट्टा ने ब्रेस्ट मिल्क किया दान: जानें क्या है 'लिक्विड गोल्ड' का महत्व

IANS | September 16, 2025 3:06 PM

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा अपने आक्रामक ड्रॉप शॉट्स और फोर फोरहैंड सर्विस के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसी 'सर्विस' की जिसकी चौतरफा चर्चा है! उन्होंने करीब 30 लीटर ब्रेस्ट मिल्क दान किया। उनके एक्टर-डायरेक्टर पति विष्णु विशाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।

दोस्तों के बगैर अकेले गुजारा बचपन बड़े होने पर बन सकता है कई समस्याओं का कारण: अध्ययन

IANS | September 13, 2025 8:56 PM

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। अगर बचपन में आपके सारे दोस्त काल्पनिक थे, तो हो सकता है कि आपकी परेशानियां अभी खत्म न हुई हों। शोध से पता चला है कि बचपन में अकेलापन बड़े होने पर कई समस्याओं का कारण बन सकता है—खासकर जब बात मेंटल हेल्थ की हो।

'टर्मरिक लाटे' से करें दिन की शुरुआत, रहेंगे चुस्त-दुरुस्त और खुशगवार

IANS | September 13, 2025 8:30 PM

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। 'टर्मरिक लाटे' का स्वाद जरूर सबने लिया होगा। नाम सुनकर असमंजस में मत पड़ जाइए क्योंकि ये है हमारे लगभग हर भारतीय घर की शान, गोल्डन ड्रिंक! और जिसे भारत में पारंपरिक रूप से हल्दी वाला दूध कहते हैं। जी हां, इसे ही पश्चिमी देशों में टर्मरिक लाटे का तमगा मिला है।