जब भगत सिंह को छुड़ाने के लिए ट्रक चलाना सीखा, वही युवा आगे चलकर बना महान साहित्यकार ‘अज्ञेय’
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। "हाथों ने बहुत अनर्थ किए, पग ठौर-कुठौर चले। मन के आगे भी खोटे लक्ष्य रहे, वाणी ने (जाने अनजाने) सौ झूठ कहे। पर आंखों ने हार, दुख, अवसान, मृत्यु का, अंधकार भी देखा तो सच-सच देखा।" हिंदी साहित्य में जब भी नए प्रयोगवादी कवि की बात होती है तो सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' का नाम सबसे पहले याद आता है। कविता, उपन्यास, निबंध और पत्रकारिता, हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले 'अज्ञेय' ने हिंदी साहित्य को परंपरागत रास्तों से हटाकर प्रयोगवाद चेतना की नई दिशा दी।