हिंग्लिश हिंदी का अंत नहीं, नई यात्रा का पड़ाव : अवधेश वर्मा
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। क्या सचमुच हमारी मातृभाषा पतन की ओर है या हम एक नई, आधुनिक हिंदी के जन्म के चश्मदीद गवाह बन रहे हैं? मौजूदा समय में हिंदी भाषा देवनागरी की मोहताज नहीं रही, बल्कि रोमन और हिंग्लिश में भी अपने पंख पसार रही है।