वडोदरा, 12 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम में हर्षित राणा को एक तेज गेंदबाज के रूप में जगह मिली थी। पिछले एक साल में दाएं हाथ के इस गेंदबाज ने तीनों ही फॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन किया है। गेंदबाजी के साथ ही उन्हें बल्लेबाजी का भी मौका दिया जाता है और इसका श्रेय हेड कोच गौतम गंभीर को दिया जाता है। राणा ने इसका खंडन किया है।
वडोदरा में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला जीतने के बाद बीसीसीआई टीवी पर हर्षित राणा ने अपनी बल्लेबाजी को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी की शुरुआत पापा ने करवाई थी। वे शुरू से ही मेरी बल्लेबाजी पर ध्यान देते रहे हैं। उनका मानना है कि ऑलराउंडर्स को भारतीय टीम में जल्दी खेलने का मौका मिलता है, इसलिए उन्होंने हमेशा गेंदबाजी के साथ-साथ मेरी बल्लेबाजी पर भी ध्यान दिया है।
राणा ने कहा कि पापा हर मैच के बाद मुझे फोन करते हैं। मैं जिस तरह 20 रन पहले आउट होकर आया, मुझे डर लग रहा है कि मैं उनसे कैसे बात करूंगा।
हर्षित राणा के इस बयान से स्पष्ट हो गया है कि गेंदबाजी के साथ ही बल्लेबाजी पर भी वह कम उम्र से ही ध्यान देते हैं और इसके पीछे की वजह उनके पिता हैं।
न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पहले मैच में राणा ने गेंदबाजी और फिर बल्लेबाजी में उपयोगी अंशदान देते हुए टीम इंडिया की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। गेंदबाजी में 10 ओवर में 65 रन देकर 2 विकेट लेने वाले राणा ने बल्लेबाजी के दौरान 23 गेंद पर 29 रन बनाए थे।
राणा ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा कि टीम उन्हें एक ऑलराउंडर के रूप में तैयार करना चाहती है ताकि अगर निचले क्रम में कुछ रनों की जरूरत हो, तो मैं बना सकूं।
न्यूजीलैंड के दिए 301 रन के लक्ष्य को भारतीय टीम ने 49 ओवर में 6 विकेट पर 306 रन बनाकर हासिल किया था। 93 रन बनाने वाले विराट कोहली प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे।
--आईएएनएस
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