यादों में नानाजी : जेपी की ढाल और आपातकाल का 'अंडरग्राउंड कमांडर'
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। कल्पना कीजिए एक ऐसे लड़के की, जिसके पास स्कूल की फीस भरने और किताबें खरीदने तक के भी पैसे नहीं थे। वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए कड़कड़ाती धूप में गलियों में सब्जियां बेचा करता था। किसे पता था कि सब्जी बेचने वाला यह साधारण सा लड़का एक दिन भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा रणनीतिकार बनेगा? कोई यह सोच भी नहीं सकता था कि यह शख्स देश के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए कैबिनेट मंत्री के पद को मुस्कुराते हुए ठुकरा देगा? यह कहानी है भारत के 'राष्ट्र ऋषि' चंडिकादास अमृतराव देशमुख की, जिन्हें दुनिया प्यार और सम्मान से 'नानाजी देशमुख' के नाम से जानती है।