यादों में 'हरिऔध' और विजयानंद : कानूनगो ने रचा महाकाव्य, वकील ने 'रामचरितमानस' के रहस्यों को खोला
नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। इतिहास में कुछ तारीखें महज कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं। वे युगों के अंत और आरंभ की गवाह होती हैं। भारतीय साहित्य और वैचारिक मीमांसा के पन्नों में 16 मार्च एक ऐसी ही रहस्यमयी और विस्मयकारी तारीख है। इस एक दिन ने हिंदी जगत से उसके दो सबसे महान साधकों को छीन लिया, जब 16 मार्च 1947 को अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ने अंतिम सांस ली, और ठीक आठ वर्ष बाद 16 मार्च 1955 को विजयानंद त्रिपाठी इस नश्वर संसार से विदा हुए।