यादों में चंद्र: देवदास का दर्द, पारो का प्रेम और चंद्रमुखी की पीड़ा
नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। वह एक ऐसा लेखक था जिसके पास न कोई डिग्री थी, न समाज में रूतबा, और न ही जेब में पैसा, लेकिन जब उसने कलम उठाई, तो उसने बंगाल के भद्रलोक से लेकर रंगून के मजदूरों तक, हर दिल को जीत लिया। यह कहानी है बांग्ला साहित्य के अमर कथाशिल्पी, शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की।