मंदिरों में क्लॉकवाइज क्यों लगाते हैं प्रदक्षिणा? जानें क्या कहता है अध्यात्म और विज्ञान

IANS | April 5, 2026 12:28 PM

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा या परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसे सिर्फ धार्मिक रीति नहीं बल्कि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है।

6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

IANS | April 5, 2026 8:41 AM

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत हो या शुभ-अशुभ समय की जानकारी पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि शुभ समय में किया गया कार्य फलदायी वहीं, अशुभ समय में किए कार्य में बाधा आती है और सफलता भी नहीं मिलती।

एमएसटी पर संतों का एकमत, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती बोले- उज्जैन है समय का प्राचीन केंद्र

IANS | April 4, 2026 9:03 PM

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (एमएसटी) को ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) की जगह अपनाने के प्रस्ताव पर देशभर के संतों-महंतों ने जोरदार समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पूरी दुनिया भारतीय सनातन परंपरा और प्राचीन खगोलीय ज्ञान के अनुरूप महाकाल स्टैंडर्ड टाइम को वैश्विक समय प्रणाली के रूप में स्वीकार करे।

शिवनगरी काशी में विराजते हैं 'बटुक भैरव', प्रसाद में चढ़ता है टॉफी- बिस्किट और खिलौने, दर्शन से दूर होते संतान के कष्ट

IANS | April 4, 2026 7:50 PM

वाराणसी, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। मान्यता है कि देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी के कण-कण में उनका वास है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में स्थित छोटे-बड़े हर एक मंदिर की अपनी एक अद्भुत कथा और मान्यता है, जो भक्तों के विश्वास और भक्ति को और भी मजबूत करता है। ऐसा ही एक मंदिर वाराणसी की तंग गलियों में हैं, जहां भैरव बाबा बाल या बटुक रूप में विराजते और दर्शन मात्र से संतान संबंधी समस्याओं के साथ ही अन्य कष्टों को भी दूर करते हैं।

रोजगार और रोग मुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ के इस मंदिर में लगती है भक्तों की भीड़, सात रूपों में मां भवानी देती हैं दर्शन

IANS | April 4, 2026 6:03 PM

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। रोजगार और रोग मुक्ति के लिए लोग बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को नौकरी लगने में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

संकटनाशन गणपति की आराधना को समर्पित विकट संकष्टी का पर्व, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

IANS | April 4, 2026 9:14 AM

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व 5 अप्रैल, रविवार को पड़ रहा है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट रूप की इस दिन विशेष आराधना की जाती है।

क्यों ईस्टर संडे पर चली आ रही अंडों को रंगने की परंपरा? जानें ईस्टर एग्स की पीछे की रोचक कहानी

IANS | April 3, 2026 10:55 PM

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। ईसाई धर्म की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा ईस्टर संडे 5 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ खुशी का नहीं, बल्कि ईसाइयों के उस विश्वास को भी मजबूत करता है कि यीशु मसीह ईश्वर के पुत्र हैं।

यहां नंदी नहीं, बकरा है महादेव की सवारी, उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर बेहद खास

IANS | April 3, 2026 9:55 PM

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अक्सर हमने सुना है कि कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक नहीं है। मंगल की स्थिति कुंडली में सही नहीं होने पर तनाव, परिवार में कलह और शादी में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

त्रेतायुग से जुड़ा है 'त्रिवेणी रक्षक' का इतिहास, यहां दर्शन किए बिना अधूरी मानी जाती है प्रयागराज की तीर्थयात्रा

IANS | April 3, 2026 9:04 PM

प्रयागराज, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। शिवनगरी काशी के पड़ोस में प्रयागराज स्थित है, जिसे 'संगम नगरी' भी कहा जाता है। इस 'नगरी के रक्षक' नारायण हैं। शहर में भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र तीर्थ है, यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि त्रेतायुग का जीवंत साक्षी भी है। मान्यता है कि नारायण के मंदिर में दर्शन किए बिना प्रयागराज की तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती।

मंदिरों के शिखर सपाट क्यों नहीं होते? जानें इसके पीछे का विज्ञान

IANS | April 3, 2026 1:14 PM

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय मंदिरों की एक प्रमुख विशेषता उनके पिरामिडाकार और गगनचुंबी शिखर हैं। ये शिखर न केवल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना हैं, बल्कि इनके निर्माण के पीछे प्राचीन भारतीय वास्तुकला, ऊर्जा विज्ञान और ध्वनि के गहरे सिद्धांत निहित हैं। मंदिरों की यह संरचना सदियों पुराने वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है, जो मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।