शरीर निर्बल पर भावों में बल : गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज ने पीएम मोदी पर अपनी कविता से कर दिया भाव विभोर
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। शरीर एकदम निर्बल पड़ा है बिस्तर पर लेकिन, मन दुर्बल नहीं हुआ। कविता की पंक्तियों के जरिए आवाज ऐसी उभरती है कि कोई उस आवाज की ललकार सुन ले तो कभी नहीं माने कि यह व्यक्ति इतना बेबस है कि कई सालों से इसने कमरे के बाहर जाकर सूर्य के प्रकाश को भी अपनी खुली आंखों से नहीं निहारा है।