स्मृति शेष : क्रांतिकारी खुदीराम बोस का बलिदान, स्वतंत्रता संग्राम की अमर कहानी
नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। 11 अगस्त, 1908 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन मात्र 18 वर्ष की आयु में, युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाया। उनका बलिदान न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक सशक्त विद्रोह का प्रतीक बना, बल्कि इसने देश के युवाओं में स्वतंत्रता की ज्वाला की लौ को तेज कर दिया।