शूटिंग : 'आत्मरक्षा' से 'ओलंपिक' तक पहुंचा खेल, जिसने बटोरी वाहवाही
नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। धनुष-बाण के प्रयोग के बाद शिकार और आत्मरक्षा के लिए बंदूक का इस्तेमाल होने लगा था। 1000 ईस्वी के आसपास चीन में 'फायर लांस' जैसे उपकरण सामने आ गए थे। इसके बाद 13वीं शताब्दी तक धातु के बैरल वाली बंदूकों की मदद से लोग अपना निशाना साधने लगे और धीरे-धीरे यही निशानेबाजी शौकिया खेल बनने लगी।