बालुरघाट/पंढरपुर, 25 जनवरी (आईएएनएस)। बालुरघाट के दिवंगत नाट्य व्यक्तित्व हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है। महाराष्ट्र के रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को भी यह पुरस्कार मिला है। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार का धन्यवाद किया है।
बालुरघाट में उस समय खुशी का माहौल देखने को मिला, जब दिवंगत नाट्य व्यक्तित्व हरिमाधव मुखोपाध्याय को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुने जाने की खबर सामने आई। वह केवल बालुरघाट या उत्तर बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व भारत के रंगमंच जगत के एक प्रख्यात स्तंभ थे।
उनके द्वारा अभिनीत एवं निर्देशित ‘देवांशी’ सहित कई नाटकों को देशभर में व्यापक सराहना मिली थी। पिछले वर्ष मार्च में उनका निधन हो गया था। इस वर्ष भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने का निर्णय लिया है। इस खबर से स्थानीय लोग भावुक हो उठे हैं। उनके पुत्र कृष्णेंदु मुखोपाध्याय ने बताया कि आज मानव संसाधन विकास मंत्रालय से फोन कर उन्हें इस सम्मान की जानकारी दी गई। इस सम्मान से पूरा परिवार गौरवान्वित और अत्यंत प्रसन्न है।
वहीं, महाराष्ट्र के पंढरपुर के रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को भी पद्मश्री मिला। इस पर रघुवीर खेडकर का कहना है कि पद्मश्री अवॉर्ड मिलना उनकी खुशकिस्मती है। उन्होंने इसके लिए सरकार को धन्यवाद कहा है। हालांकि, उन्होंने खुशी के इस मौके पर अपना दुख भी व्यक्त किया और बताया कि इस अवॉर्ड को पाने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह यह अवॉर्ड अपनी मां कांताबाई सातारकर और पूरी तमाशा इंडस्ट्री को समर्पित कर रहे हैं।
बता दें कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसमें महाराष्ट्र के दिग्गज लोक रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को तमाशा कला में उनके अमूल्य योगदान और संरक्षण के लिए सम्मानित किया जाएगा। चार दशकों से इस कला को जीवित रखे हुए उन्होंने अपनी मां कांताबाई सातारकर की विरासत को आगे बढ़ाया है और तमाशा को गांवों से लेकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है।
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