स्मृति शेष : उर्दू शायरी का वो शहंशाह अहमद फराज, जिसने दिल और हुकूमत को दम से ललकारा
नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। 25 अगस्त 2008 को जब उर्दू अदब का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए ओझल हो गया, तो उसके साथ गजलों का एक ऐसा दौर भी खत्म हो गया जिसने मोहब्बत और बगावत को एक ही सांस में जिया था। अहमद फराज सिर्फ शायर नहीं थे, वे एक अहसास थे, एक आवाज थे और उस जमाने की जुबान थे, जिसमें मोहब्बत का दर्द और हुकूमत से लड़ने का हौसला एक साथ गूंजता था।