77वें गणतंत्र दिवस पर बोले आचार्य प्रशांत, भीतरी स्वतंत्रता के बिना गणतंत्र अधूरा है
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने कहा कि गणतंत्र का वास्तविक अर्थ केवल संवैधानिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी शक्ति नागरिकों की भीतरी जागरूकता से आती है।