IANS
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July 17, 2025 6:35 PM
नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। जब 19वीं सदी का भारत स्त्री शिक्षा को पाप समझता था और महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर नहीं निकलती थीं। उस दौर में एक स्त्री ने न केवल पितृसत्ता को चुनौती दी, बल्कि इतिहास के पन्नों पर अपने साहस, बुद्धिमत्ता और कर्मठता से अमिट छाप छोड़ी। उनका नाम था डॉ. कादम्बिनी गांगुली, भारत की पहली महिला स्नातक, पहली महिला चिकित्सक और एक अद्वितीय समाज सुधारिका। उनका जन्म महज एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय नारी शक्ति के पुनर्जागरण की शुरुआत है। 18 जुलाई का दिन उनकी जयंती मनाने से कहीं बढ़कर उस विचार और संघर्ष को सम्मान देने का क्षण है, जिसने भारत में महिलाओं की शिक्षा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की नींव रखी।