मैत्रेयी पुष्पा: आंचलिक जीवन की अनसुनी आवाजों को मुख्यधारा में लाने वाली निर्भीक साहित्यकार
नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। कहते हैं कि मैत्रेयी पुष्पा को पढ़ते हुए अक्सर एक विरोधाभास सामने खड़ा हो जाता है। एक तरफ उनकी सादगी भरी ग्रामीण वेशभूषा, एक हल्का-सा घूंघट और शर्मीली मुस्कान। वहीं दूसरी तरफ उनकी कलम से निकली आग, जो सामंती समाज के हर बंधन और रूढ़ि की जंजीर को तोड़कर रख देती है।