सुरों की मालिनी : माटी की सोंधी सुगंध, बिरह और प्रेम संबंध, जिनके सुरों से गूंज उठी लोक संगीत
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। 11 फरवरी, सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोक संगीत के लिए एक उत्सव की तरह है। इसी दिन उत्तर प्रदेश के कन्नौज में जन्म हुआ उस आवाज की, जिसने लोक संगीत को मंच तक लाया, आंगन को फिर से सुरों से भर दिया और मिट्टी की खुशबू को शास्त्रीय अनुशासन के साथ देश-दुनिया तक पहुंचाया। हम बात कर रहे हैं, सुरों की मल्लिका मालिनी अवस्थी की। जब वह गाती हैं, तो ऐसा लगता है, जैसे कोई नदी बह रही हो, कभी शांत, कभी वेगवती, कभी बिरह में डूबी और कभी प्रेम से छलकती।