ग्रीनलैंड पर कब्जा! क्या ट्रंप कनाडा को पछाड़ना चाहते हैं या क्षेत्रीय विस्तार की पुरानी अमेरिकी परंपरा बढ़ाने की है ख्वाहिश

IANS | January 20, 2026 7:22 PM

नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड चर्चा में है। पिछले लगभग एक महीने से तकरीबन रोज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ऐसा कह देते हैं जिससे दुनिया की पेशानी पर बल पड़ जाता है। हर गुजरते दिन के साथ अमेरिका की रुचि अंतरराष्ट्रीय बहस का सबब बन गई है। सुर्खियों में तो अपना क्षेत्रफल बढ़ाकर कनाडा को पछाड़ने की जुगत भी है, जो ग्रीनलैंड को हासिल कर ही मुमकिन हो पाएगा।

21 जनवरी : पूर्वोत्तर की पहचान का प्रतीक; मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा का स्थापना दिवस

IANS | January 20, 2026 9:44 AM

नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में 21 जनवरी केवल कैलेंडर का एक साधारण दिन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय इतिहास में दर्ज एक महत्वपूर्ण पड़ाव का प्रतीक है। इसी दिन मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा ने अलग-अलग राज्यों के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान प्राप्त की और भारतीय संघ में औपचारिक रूप से स्थान पाया। इसी दिन इन तीनों राज्यों की स्थापना हुई।

ग्रीनलैंड में भीषण ठंड के बीच 'कब्जे' वाली नीति ने बढ़ाया तापमान, अमेरिका से लेकर रूस और चीन तक की नजर

IANS | January 19, 2026 9:29 PM

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड को लेकर विश्व पटल पर भूचाल आया हुआ है। अमेरिका लगातार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहा है, तो वहीं डेनमार्क उसके खिलाफ डटकर खड़ा है। दूसरी ओर रूस और चीन भी अमेरिका को आगाह कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर सुविधाओं की दिक्कत और आबादी कम होने के बावजूद भी ग्रीनलैंड को लेकर महाशक्तियों में क्यों तनातनी है।

वांसे सम्मेलन: जब हिटलर के सबसे क्रूर सहयोगी की अगुवाई में लिखी गई खौफनाक कहानी

IANS | January 19, 2026 7:24 PM

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में मौजूद वांसे झील के किनारे स्थित एक आलीशान विला में 20 जनवरी 1942 को नाजी शासन की वह बैठक हुई, जिसने मानव इतिहास के सबसे भयानक अपराध को एक सुनियोजित प्रशासनिक नीति का रूप दे दिया। इस बैठक को इतिहास में “वांसे सम्मेलन” के नाम से जाना जाता है। यहीं पर यूरोप के यहूदियों के सामूहिक नरसंहार, जिसे बाद में “होलोकॉस्ट” कहा गया, को व्यवस्थित रूप से लागू करने की योजना पर अंतिम मुहर लगाई गई थी।

इन देशों में एक व्यक्ति कितनी बार बन सकता है प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति?

IANS | January 19, 2026 6:59 PM

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। हाल ही में युगांडा में हुए राष्ट्रपति चुनाव में योवेरी मुसेवेनी ने लगातार सातवीं बार जीत हासिल की। अलग-अलग देशों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था अलग-अलग है। कोई देश राष्ट्रपति प्रणाली, कोई संसदीय प्रणाली, तो कोई मिश्रित प्रणाली पर काम करता है। आइए जानते हैं कुछ देशों में एक व्यक्ति कितनी बार एक प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है।

गिरमिटिया मजदूरी के समय से है भारत और फिजी के बीच संबंध

IANS | January 19, 2026 9:30 AM

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते अत्यंत मजबूत और गहरे हैं। दोनों देशों के संबंध बहुआयामी स्वरूप रखते हैं, जिनकी नींव गिरमिटिया मजदूरों के प्रवास के साथ पड़ी थी। समय के साथ यह रिश्ता विभिन्न क्षेत्रों में सशक्त और जीवंत साझेदारी में परिवर्तित हो चुका है।

एडगर एलन पो: आधुनिक रहस्य और हॉरर साहित्य के जनक, जिन्होंने डर को शब्दों में ढाला

IANS | January 18, 2026 7:51 PM

नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। एडगर एलन पो अमेरिकी साहित्य के उन विरले लेखकों में हैं जिन्होंने लेखन की दिशा ही बदल दी। उन्हें आधुनिक रहस्य, जासूसी और हॉरर साहित्य का जनक माना जाता है। उनके साहित्य ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में लेखकों और पाठकों की सोच को प्रभावित किया। भय, अवचेतन मन, अपराधबोध और मनोवैज्ञानिक उलझनों को जिस गहराई से पो ने शब्दों में ढाला, वह अपने समय से कहीं आगे था।

हॉलीवुड का 'शांत सितारा' केविन कॉस्टनर, बड़े से छोटे पर्दे तक पर जमाई धाक

IANS | January 17, 2026 7:44 PM

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के कैलिफोर्निया में जन्मे केविन माइकल कॉस्टनर हॉलीवुड के उन अभिनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने स्टारडम को शोर-शराबे के बजाय काम की गंभीरता से हासिल किया। वे अभिनेता, निर्देशक और निर्माता—तीनों रूपों में सफल रहे हैं और चार दशकों से अधिक समय से अमेरिकी सिनेमा का अहम चेहरा बने हुए हैं।

जब एक जनरल ने सत्ता को चेताया! आइजनहावर का विदाई भाषण और ‘मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स’ का सच

IANS | January 17, 2026 7:27 PM

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने जब राष्ट्र के नाम अपना विदाई भाषण दिया, तब बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि यह भाषण आने वाले दशकों की अमेरिकी और वैश्विक राजनीति को समझने की एक कुंजी बन जाएगा। एक ऐसे समय में, जब शीत युद्ध अपने चरम पर था और सैन्य शक्ति को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा था, आइजनहावर ने जनता को एक असहज लेकिन जरूरी सच से रूबरू कराया।

आरिफ मोहम्मद खान: पद की लालसा छोड़कर हमेशा सुनी अंतरात्मा की आवाज, सिद्धांतों के लिए कुर्सी छोड़ी

IANS | January 17, 2026 1:44 PM

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। देश की राजनीति में जब ज्यादातर रास्ते सत्ता, समझौते और चुप्पियों के पक्षधर होते हैं, तब कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो विचारों के साथ चलना चुनते हैं, चाहे उसकी कितनी ही भारी कीमत क्यों न हो। ऐसे लोग, जो जी हूजूरी करने के बजाय सवाल पूछते हैं, पद की लालसा को मन से निकाल देते हैं और यह बता देते हैं कि हम गलत को गलत कहने की क्षमता रखते हैं, चाहे इसके लिए पद को भी छोड़ना क्यों न पड़े। सत्ता के शोर में भी अंतरात्मा की आवाज सुनते रहना ही उन्हें भारतीय राजनीति में अलग बनाता है।