विवेक राजदान : क्रिकेट की आत्मा को शब्द देने वाला 'कमेंट्री का कवि'

IANS | August 24, 2025 10:59 AM

नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस) भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जो मैदान पर अपने खेल से चमके, मगर कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने क्रिकेट से संन्यास के बाद शब्दों की ताकत से करोड़ों दिलों को जीत लिया। विवेक राजदान ऐसी ही शख्सियत हैं। 25 अगस्त, 1969 में पैदा हुए राजदान भारतीय टीम के लिए एक तेज गेंदबाज के तौर पर खेले। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा न खिंच पाया, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली की ओर से अपनी छाप छोड़ी। इसके बाद भी, असली जादू तो तब शुरू हुआ जब उन्होंने माइक्रोफोन हाथ में लिया।

आमी 'कलकत्ता' : 'भद्रलोक' की भव्य गाथा, आधुनिक शहर यही, पुरानी धड़कन भी वही...

IANS | August 23, 2025 11:30 PM

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। 335 साल पहले, तारीख 24 अगस्त 1690, ये वो तारीख है, जब कलकत्ता (कोलकाता) इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बनाने की शुरुआत कर चुका था। यह वह दिन था जब ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारी जॉब चार्नॉक ने हुगली नदी के तट पर तीन गांवों को मिलाकर एक व्यापारिक केंद्र की नींव रखी। शायद ही किसी ने उस वक्त सोचा था कि यह छोटा सा कदम भारत के सांस्कृतिक, व्यापारिक और ऐतिहासिक नक्शे पर एक ऐसी छाप छोड़ेगा, जो सदियों तक अमर रहेगा।

गंभीर बीमारियों से बचाएंगे ये टीके, किशोरियों को समय पर लगवाना जरूरी

IANS | August 23, 2025 4:07 PM

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। बचपन और युवावस्था के बीच का समय, यानी किशोरावस्था, एक ऐसा दौर होता है जब लड़कियों का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तेजी से विकास होता है। यह उम्र न केवल उनके भविष्य की नींव रखती है, बल्कि उनके आने वाले मातृत्व की दिशा भी तय करती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि इस उम्र में लड़कियों को ऐसी सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा दी जाएं, जो उन्हें बीमारियों से बचा सके। खासतौर पर ऐसे रोग, जो भविष्य में गर्भावस्था के समय मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा बन सकते हैं।

बसवराज राजगुरु: 'हिंदुस्तानी संगीत के राजा', जिन्होंने शास्त्रीय गायन को दी नई ऊंचाई

IANS | August 23, 2025 12:18 PM

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में कुछ ऐसी हस्तियां रही हैं, जिन्होंने अपनी कला से न केवल संगीत की दुनिया को समृद्ध किया बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया। उन्हीं में से एक हैं पंडित बसवराज राजगुरु, जो एक शास्त्रीय गायक थे। उनकी गायकी में किराना, ग्वालियर और आगरा घरानों की विशेषताओं का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है, जिसने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच अमर बना दिया।

जयंती विशेष: बीना दास और राजगुरु, स्वतंत्रता संग्राम के दो सूर्य, जिनकी क्रांति और बलिदान आज भी करते हैं प्रेरित

IANS | August 23, 2025 11:03 AM

नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। 24 अगस्त का दिन उन दो महान क्रांतिकारियों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने अपने प्राण भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिए। इनमें एक थीं निडर और प्रेरणास्रोत वीरांगना बीना दास, और दूसरे थे शहीद शिवराम हरि राजगुरु, जिनकी गाथा आज भी युवाओं में जोश और राष्ट्रभक्ति का संचार करती है।

जयंती विशेष : फिजिक्स पढ़ना चाहती थीं, बनीं 'वेदर वुमन ऑफ इंडिया', अन्ना मणि की प्रेरक वैज्ञानिक यात्रा

IANS | August 22, 2025 3:57 PM

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। आज का भारत मौसम से जुड़ी जानकारी देने के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है। हवा की दिशा में बदलाव हो या तापमान में उतार-चढ़ाव, हर मौसम संबंधी अपडेट कुछ ही पलों में जनता तक पहुंच जाता है। यह सब इतनी सहजता से संभव हो पाया है तो उसके पीछे दशकों की मेहनत और वैज्ञानिक शोध हैं। इस क्रांति की एक प्रमुख वैज्ञानिक थीं अन्ना मणि, जिन्हें 'वेदर वुमन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है। उनकी दूरदृष्टि, समर्पण और वैज्ञानिक योगदान के कारण ही भारत में सटीक मौसम पूर्वानुमान संभव हो पाया।

गिरिजाकुमार माथुर और सोंभु मित्रा: साहित्य और रंगमंच के प्रगतिशील सितारे

IANS | August 21, 2025 8:41 PM

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में 22 अगस्त की तारीख खास है। इस दिन दो ऐसे रचनाकारों का जन्म हुआ, जिन्होंने अलग-अलग विधाओं में कला को नया आयाम दिया। हिंदी के प्रगतिशील कवि गिरिजाकुमार माथुर और बंगाली रंगमंच के प्रखर अभिनेता-निर्देशक सोंभु मित्रा। एक ने शब्दों और गीतों के माध्यम से जनमानस को स्वर दिया। वहीं, दूसरे ने रंगमंच की शक्ल बदलकर उसे सामाजिक परिवर्तन का औजार बनाया।

‘वैष्णव की फिसलन’, परसाई की कृति जो आज भी समाज को आईना दिखाती है

IANS | August 21, 2025 10:46 AM

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। आज के दौर में लोग अपने अंदर की कमी को दूर करने से ज्यादा दूसरों में कमी ढूंढने की तलाश में रहते हैं। लोगों को सोच ऐसी हो गई है कि उन्हें लगता है कि वह जो कहते हैं, बोलते हैं वह एकदम सही है और दूसरा व्यक्ति जो कह रहा है वह गलत है उसमें सुधार की जरूरत है। हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य ‘वैष्णव की फिसलन’ उन लोगों पर सटीक बैठती है तो अपनी कमियों को छिपाने के लिए नैतिकता का मुखौटा पहन लेते हैं।

वो औरत जो कभी चुप नहीं रही, कलम से किया विद्रोह; अदब, आग और आजादी की मिसाल

IANS | August 20, 2025 7:05 PM

नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। जब लड़कियों को खिलौनों से खेलना सिखाया जाता था, वो गिल्ली-डंडा लेकर मैदान में उतरती थी। जब उन्हें पर्दे में रखने की हिदायत दी जाती थी, वो खुले आसमान को अपनी किताब बना लेती थी। जब समाज ने कहा कि औरत का धर्म है सहना, वो बोली-'क्यों?' वो सिर्फ लिखती नहीं थी, जीती थी, हर उस सवाल को, जिससे समाज ने आंखें मूंद रखी थीं। उसके शब्द चुप नहीं थे, उसके वाक्य झिझकते नहीं थे। उसके किरदार काल्पनिक नहीं थे, वे उन आंगनों, रसोईघरों और उन दुपट्टों के पीछे की औरतें थीं जिनकी सांसें अक्सर दबा दी जाती थीं।

शहनाई के जादूगर : शिव और शिवनगरी के प्रेमी थे ‘उस्ताद’, 'मेरी गंगा कहां से लाओगे' कह ठुकरा दिया था अमेरिका का प्रस्ताव

IANS | August 20, 2025 4:43 PM

नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जब शहनाई बजाते थे तो मानो गंगा की धारा बह उठती थी। छोटे से वाद्ययंत्र के छिद्रों पर उनकी जादुई पकड़ ने शहनाई को भारत की आत्मा और बनारस की पहचान बना दिया और उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि दिलाई। उस्ताद के लिए सबसे बड़ा सम्मान गंगा के घाट और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी थी। यही कारण है कि जब उन्हें अमेरिका में बसने का प्रस्ताव मिला, तो उन्होंने बड़ी सहजता से जवाब दिया, "अमेरिका में आप मेरी गंगा कहां से लाओगे?”