“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं”, सत्ता के गलियारों में गूंजता था दुष्यंत कुमार का नाम
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”, ये रचना पढ़ते ही सबसे पहला नाम आता है दुष्यंत कुमार का। जिनकी इस कविता ने क्रांति का ऐसा जोश भरा कि हर ओर सिर्फ उन्हीं की चर्चा होती थी।