जब ‘द लाइफ ऑफ क्राइस्ट’ ने बदली दादा साहेब फाल्के की जिंदगी, ऐसे हुई भारतीय फिल्मों की शुरुआत
मुंबई, 15 फरवरी (आईएएनएस)। साल 1910 में क्रिसमस की रात बंबई (अब मुंबई) का 'अमेरिका-इंडिया पिक्चर पैलेस' दर्शकों से भरा था। पर्दे पर एक विदेशी फिल्म चल रही थी, 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट'। अंधेरे हॉल में बैठे सैकड़ों लोग मंत्रमुग्ध थे, लेकिन भीड़ में एक 40 वर्षीय व्यक्ति ऐसा भी था जिसकी आंखों में फिल्म नहीं, बल्कि एक भविष्य चल रहा था।