जब गीतों के लिए मिला था 25 हजार का चेक, आंखों से आने लगे थे आंसू, गढ़वाली गीतों के पुरोधा जीत सिंह नेगी की कहानी
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। 'इस धरती पर कुदरत ने महामानव की सृष्टि की। जहां पर देवताओं की प्रथम ये देवभूमि थी। यहीं गंगा से सजपुर सोने गहराता तो है घना, यहीं ऋषियों ने तप करके महावेदों की रचना की। जहां के ऊंचे शिखरों पर प्रथम होता सवेरा, इसी हिमनंद की गोदी में उत्तराखंड है मेरा।' पर्वतीय संस्कृति के लोकवाहक, गढ़वाली गीतों के पुरोधा और रचनाकार जीत सिंह नेगी ने इसी देवभूमि की आत्मा को शब्दों, सुरों और रंगमंच के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का काम किया।