यादों में चट्टोपाध्याय : वो अफसर जिसने अंग्रेजों की नौकरी करते हुए रची बगावत, दिया देशभक्ति का पहला मंत्र
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। 'साहित्य सम्राट' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारत को 'वंदे मातरम' का एक ऐसा मंत्र दिया जिसने आजादी की लड़ाई का रुख ही बदल दी। 26 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के नैहाटी के पास कांठलपाड़ा में जन्मे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कहानी ही विरोधाभासों से शुरू होती है। साल 1857, जब पूरा उत्तर और मध्य भारत अंग्रेजों के खिलाफ 'सिपाही विद्रोह' की आग में सुलग रहा था, तब कलकत्ता में एक अलग ही शांति पसरी थी। कलकत्ता विश्वविद्यालय अपनी पहली डिग्री परीक्षाएं ले रहा था। बंदूकों के शोर के बीच बंकिम अपनी किताबों में खोए थे और इतिहास के पहले दो स्नातकों में से एक बनकर निकले।