जब बाल मन में 'लक्ष्मण रेखा' से बैठा डर, 'सीता हरण' अध्याय से जुड़ी रवींद्रनाथ टैगोर की वह कहानी
नई दिल्ली, 6 मई (आईएएनएस)। राजसी ठाट-बाट और शानो-शौकत वाला एक अमीर खानदान। बंगाल के सबसे बड़े शहर कोलकाता में उस ठाकुर खानदान का रुतबा था। दूर-दूर तक लोग इस परिवार की चर्चा किया करते थे। इसी खानदान में जब देवेंद्रनाथ ठाकुर और सारदा देवी की 14वीं संतान के रूप में बेटा आया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि सारी दुनिया में एक दिन उसके नाम का डंका बजेगा। बात हो रही है रवींद्रनाथ टैगोर की।