भविष्य बचाना है तो भूमि बचानी होगी, विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस का यही संदेश
नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। जरा कल्पना कीजिए उस धरती की, जिसने सदियों से आपको भोजन, जल और जीवन देने का काम किया, लेकिन वही धरती अब अपनी उर्वरता खो रही है। खेत बंजर हो रहे हैं, जल के स्रोत सूख रहे हैं और हर तरफ रेतीली जमीन फैलती जा रही है। यह किसी रेगिस्तान के विस्तार की कहानी से कहीं बढ़कर मानव अस्तित्व से जुड़ी एक गंभीर चेतावनी है। यही कारण है कि हर वर्ष 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया को भूमि संरक्षण और उसके सतत उपयोग के महत्व का एहसास कराना है।