साहित्यकार मोहन राकेश: जब गरीबी के हालातों ने पिता की अर्थी रोक दी, तब मां की चूड़ियां बिकने से हुआ अंतिम संस्कार
नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। "हममें से हर कोई अधूरा है, अधूरा है क्योंकि हसरतें अधूरी हैं, क्योंकि हम हमेशा पूर्णता की खोज में आधे अधूरे रहते हैं।" जिंदगी का यही स्याह सच एक लेखक ने बड़ी महारथ के साथ समझाया था। वे थे जाने माने लेखक और नाटककार मोहन राकेश। मोहन राकेश आधुनिक हिंदी कथा साहित्य में 'नई कहानी' आंदोलन के प्रसिद्ध कथाकार माने जाते हैं। आज भी मोहन राकेश का साहित्य आधुनिक हिंदी साहित्य में 'मील का पत्थर' माना जाता है।