हिंदी की शक्ति उसकी समावेशी संस्कृति में, उर्दू, लोकभाषाओं और साहित्यकारों ने मिलकर गढ़ी मजबूत पहचान
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी हुई ऐसी भाषा है, जिसमें कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समेटा हुआ है। उर्दू भाषा ने हिंदी को कई खूबसूरत, प्रभावी और संवेदनशील शब्द दिए हैं, जिसके बिना हिंदी अधूरी लगती है। उर्दू की वजह से हिंदी में शायरी, गजल और नज्मों की एक शानदार परंपरा मजबूत हुई, जिसने भावनाओं को व्यक्त करने के नए रास्ते खोले। कबीर और अमीर खुसरो से लेकर आधुनिक काल तक, बोलचाल और लोक-साहित्य में दोनों ने एक-दूसरे को सींचा है।