बोलपुर का सियासी गणित : वामपंथ का लाल रंग टीएमसी के हरे रंग में कैसे हुआ तब्दील?
कोलकाता, 15 मार्च (आईएएनएस)। जब हम पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की चर्चा करते हैं, तो मानस पटल पर यहां की लाल माटी, एकतारे की गूंज और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के 'शांतिनिकेतन' की दार्शनिक छवि खुद उभर आती है। किंतु वर्तमान में 41-बोलपुर (अनुसूचित जाति आरक्षित) लोकसभा क्षेत्र मात्र एक सांस्कृतिक केंद्र भर नहीं रह गया है। आज यह निर्वाचन क्षेत्र एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है, जहां एक ओर इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, तो दूसरी ओर आधुनिक रियल एस्टेट का बूम, कोयला खदानों से जुड़े विवाद और राजनीतिक सत्ता का भीषण संघर्ष है।